संत कहते हैं कि प्रेम से अपने आपको भर लो और अभिमान से दूर होने के प्रयत्न करते रहो। चाहे स्वयं के प्रति, समाज, परिवार या देश के प्रति।
जितना आप छोटी छोटी व बेकार बातों से दूर रहोंगे उतना मन आपका अच्छी सोच और कुछ अच्छा सीखने की जागृति पैदा करेगा और फिर वह समय आएगा आप पूर्ण रूप से आनंद भर जाओगे।
उस अवस्था को प्राप्त कर जाएंगे जहां सिर्फ और सिर्फ पूर्ण आनंद होता है। ये शब्द मुनिश्री विनय कुमार आलोक ने अणुव्रत भवन सेक्टर-24 में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहे।
उन्होंने कहा कि हम संसार में रहते हुए इतनी छोटी छोटी बातों में उलझते रहते हैं जिनका कोई मूल अर्थ ही नहीं होता और उन बातों को इतने चाव से सुनते हैं, लेकिन अगर कोई हमें धार्मिक ज्ञान की बात समझाने लगता है तो हम उसका उपहास करते हैं और जब धर्म के सत्संग में बैठते हैं तो मन कभी इधर तो कभी उधर ये मन भी बड़ा शैतान है।