करौंथा आश्रम के मुखी संत रामपाल के आगे हरियाणा सरकार बौनी पड़ गई और उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी। डीजीपी एसएन वशिष्ठ ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र दायर कर कहा कि गिरफ्तारी का प्रयास किया गया था, लेकिन डेरे में बड़ी संख्या में महिलाएं व बच्चे मौजूद थे और पुलिस प्रबंध नाकाफी था।
जस्टिस एम. जियापाल की डिवीजन बेंच ने सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए संत रामपाल के दोबारा वारंट जारी किए हैं और सरकार को निर्देश दिया है कि 17 नवंबर तक रामपाल को हाईकोर्ट पेश किया जाए। डीजीपी ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के लिए डेरे में गई पुलिस को एक श्रद्धालू ने बताया कि रामपाल बीमार हैं, लिहाजा डीसी हिसार ने सरकारी डाक्टरों का बोर्ड बनाकर तथ्यों की पुष्टि करवाई। पाया गया कि रामपाल को आराम की सख्त जरूरत है। वशिष्ठ ने वारंट लागू नहीं कराने पर खेद प्रगट करते हुए गिरफ्तारी के लिए और समय भी मांगा।
एमिक्स क्यूरे सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने पैरवी के दौरान आरोप लगाया कि सरकार संत रामपाल को बचाने का प्रयास कर रही है। वारंट जारी होने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए रामपाल ने डेरे में समर्थक एकत्र किए और ऊपर से उपायुक्त हिसार ने मेडिकल बोर्ड गठित कर रामपाल के बचाव के लिए रास्ता बना दिया।