पंजाब के डीजीपी जब हाईकोर्ट में भगोड़े बिल्डर जरनैल सिंह बाजवा को तमाम प्रयासों के बावजूद गिरफ्तार करने में नाकाम होने की दलील दे रहे थे तब वह चुपचाप वीसी से केस सुन रहा था।
वीसी के जरिए उसने अदालत में पेश होने की मोहलत मांगी तो हाईकोर्ट ने उसे फटकार लगाते हुए इससे इनकार कर दिया। इस वाकये से पुलिस के प्रयासों को बता रहे कोर्ट में मौजूद डीजीपी की काफी किरकिरी हुई। डीजीपी की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में पुलिस को बाजवा की तलाश करने में नाकाम बताया गया।
केस की सुनवाई शुरू होते ही डीजीपी ने हाईकोर्ट को बताया कि बाजवा पर कुल 53 एफआईआर हैं। हाईकोर्ट ने पाया कि इनमें से 39 में जांच लंबित है और कुछ मामले तो 5 साल से भी पुराने हैं। डीजीपी ने कोर्ट को विश्वास दिलाया कि इनकी जांच जल्द पूरी कर ली जाएगी। हाईकोर्ट ने इस पर डीजीपी को आदेश दिया कि अगली सुनवाई पर यह बताया जाए कि कब तक इन मामलों में जांच पूरी होगी।
बेंच सेक्रेटरी ने दी जानकारी
सुनवाई के दौरान बेंच सेक्रेटरी ने पाया कि बाजवा चुपचाप कोर्ट की कार्रवाई सुन रहा था। इस पर हाईकोर्ट ने बाजवा से पूछा कि हमारे आदेश के बावजूद आप कोर्ट में हाजिर क्यों नहीं हुए। बाजवा ने कहा कि वह कुछ शिकायतकर्ताओं से समझौता करने के लिए पैसे का इंतजाम कर रहा है। उसे पेश होने के लिए 15 दिन की मोहलत दी जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि बार-बार मौका देने के बावजूद आप पेश नहीं हुए, आप किसी भी रहम के हकदार नहीं हैं।
हाईकोर्ट ने बाजवा को आदेश दिया कि वे अपनी सभी संपत्तियों की अगली सुनवाई पर जानकारी दें। इसमें चल, अचल संपत्ति व कंपनियों का ब्योरा भी हो। इसके बाद हाईकोर्ट ने डीजीपी से जवाब मांगा कि जिस व्यक्ति को तमाम प्रयासों के बावजूद गिरफ्तार न कर पाने की बात कर रहे हैं, वह वीसी के जरिए कोर्ट से जुड़ा है। डीजीपी गौरव यादव ने शर्मिंदा कर देने वाली स्थिति में इस मामले में पुलिस की असफलता और ढिलाई को स्वीकार किया। हाईकोर्ट ने कहा कि कृत्य और आचरण न केवल अवमाननापूर्ण, न्यायिक मशीनरी और उसके कामकाज में बाधा उत्पन्न करने का भी प्रयास है।