विलक्षण प्रतिभा के धनी व्यक्ति ही राजनीति के ऊंचे मुकाम तक पहुंचते हैं। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल भी उनमें से एक हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते आदमपुर के लोगों का ऐसा विश्वास जीता, जो आज तक बरकरार है। विकास और रोजगार इसके दो मजबूत आधार हैं। यही कारण रहा कि 1967 से लेकर 2019 तक पार्टी चाहे कोई भी रही हो आदमपुर के चुनावी रण में विजय पताका हमेशा भजन लाल के परिवार ने ही फहराई।
भजन लाल में ऐसी कला थी कि वे विरोधियों का भी दिल जीत लेते थे। काम करते वक्त कभी नहीं देखा कि सामने वाला पार्टी कार्यकर्ता है, उनका समर्थक है या विरोधी। जो भी आया काम जायज होने पर करवाकर ही लौटा। वह लगातार लोगों के संपर्क में रहते थे। उनके मुख्यमंत्री रहते वैसे तो आदमपुर के लोगों को चंडीगढ़ आने की जरूरत ही नहीं पड़ी, अगर आए तो सीएम निवास के दरवाजे हमेशा खुले ही मिले। उन्होंने आदमपुर की प्यास बुझाई, पानी और नहरें तक पहुंचाईं।
वह जनमानस के नेता बन चुके थे। बोली में इतनी मिठास थी कि सामने वाला फिदा हो जाता था। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते आदमुपर हलके के लगभग 22 हजार लोगों को रोजगार दिया। इसमें छोटे तबके के लोगों को कर्मचारी लगाया, जो अब तक उनके परिवार का साथ देते आ रहे हैं। कर्मचारियों का वोट बैंक हर चुनाव में भजन लाल परिवार को शुरूआत में ही लीड दिला देता है, जिसे अंत तक तोड़ने में विरोधियों के पसीने छूट जाते हैं।
भजन लाल, पत्नी जसमा देवी, बेटे कुलदीप बिश्नोई, बहू रेणुका बिश्नोई यहां से विधायक रह चुके हैं, अब भव्य बिश्नोई को विधानसभा पहुंचाने के लिए पटकथा लिखी जा चुकी है। कुलदीप के सामने गढ़ तो कांग्रेस के सामने अपनी परंपरागत सीट बचाने की चुनौती है। भव्य को वह विधानसभा पहुंचा पाते हैं या उलटफेर का शिकार होते हैं। यह छह नवंबर को चुनाव नतीजे बताएंगे लेकिन चुनावी जंग रोचक होने वाली है। आम आदमी पार्टी पहली बार यहां से मुकाबले में है। जिससे मुकाबला चतुष्कोणीय भी हो सकता है, क्योंकि, इनेलो ने अगर करण-अुर्जन में से एक पर दांव खेला तो भाजपा, कांग्रेस, आप और इनेलो में जीत के लिए सिर धड़ की बाजी लगेगी।