उड़न सिख मिल्खा सिंह दृष्टिहीन बच्चों से बहुत प्यार करते थे। वह हर साल ब्लाइंड वॉक करवाते थे ताकि उनकी पीड़ा को महसूस किया जा सके। यह ब्लाइंड वॉक सेक्टर 17 में आयोजित की जाती थी। इसमें लोग एक किलोमीटर तक आंखों पर पट्टी बांधकर चलते थे। 2019 में जब यह कार्यक्रम आयोजित किया गया तो मिल्खा सिंह अपनी पत्नी के साथ मुख्य अतिथि बने थे। उन्होंने कहा था कि आंखों को जलाने के बजाय उन्हें दान कर देना चाहिए ताकि हमारी मौत के बाद किसी दृष्टिहीन को भी प्रकृति देखने और महसूस करने का अवसर मिल सके। मिल्खा सिंह की बात से प्रभावित होकर काफी लोगों ने पीजीआई में अपनी आंखें दान करने के लिए फार्म भरे थे।
महिलाओं को आगे रखने के पक्षधर थे मिल्खा सिंह
उनके मित्र स्वदेश तलवार ने बताया कि उनके जाने से मैं खुद को बहुत अकेला महसूस कर रहा हूं। मेरे दिल में वह हमेशा जिंदा रहेंगे। तलवार ने बताया कि वह जब आखिरी बार ब्लाइंड वॉक में शामिल हुए तो उन्होंने मेरी पत्नी के बारे में पूछा और उन्हें स्टेज पर बुलाकर बहुत प्यार से बात की। उनका मानना था कि महिलाओं को हमेशा आगे रहना चाहिए। इसीलिए वह हर जगह अपनी पत्नी को साथ लेकर जाते थे। निर्मल कौर ने काफी गरीब लड़कियों के विवाह में भी सहयोग किया।
पंजाब विश्वविद्यालय ने फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह को वर्ष 2018 में खेल रत्न का पुरस्कार दिया। वर्ष 2014 में पीयू के वीसी प्रो. एके ग्रोवर ने चार नए पुरस्कारों की शुरुआत की, जिसमें ज्ञान रत्न, साहित्य रत्न, कला रत्न व खेल रत्न शामिल थे। पहला खेल रत्न पुरस्कार हॉकी के महान खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर को दिया गया और दूसरी बार मिल्खा सिंह का चयन किया गया। पुरस्कार दीक्षांत समारोह में दिया जाना था। इससे पहले मिल्खा सिंह ने यह जाना कि उन्हें पुरस्कार के लिए क्यों चुना गया है, जब पीयू ने उनके सवाल का संतोषजनक जवाब दिया तभी उन्होंने पुरस्कार स्वीकार किया। पुरस्कार उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू की ओर से दिया गया था। पूर्व वीसी प्रो. एके ग्रोवर का कहना है कि वह एक शानदार व्यक्ति थे। खिलाड़ियों के अलावा अन्य लोगों से भी मिलते थे तो एक सकारात्मक विचार सबके बीच छोड़ देते थे।