मोहाली। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस आज है। इसका उद्देश्य आत्महत्या को रोकने और उसके प्रति जागरूकता फैलाना है। इस वर्ष का थीम ‘क्रिएटिंग होप थ्रू एक्शन’ है। निराशा आत्महत्या के प्रमुख संकेतकों में से एक है इसलिए आशा पैदा करना सहायक होगा। यह बात मनोचिकित्सक डॉ. हरवंदन कौर बेदी ने कही। उन्होंने कहा कि आत्महत्या जटिल मुद्दा है लेकिन अपनी सोच-समझ और ज्ञान से हम आत्महत्या के विचारों और इरादों वाले लोगों की मदद कर सकते हैं। आत्महत्या के आंकड़े चिंताजनक होते जा रहे हैं। दुनिया भर में सालाना आठ लाख आत्महत्याएं होती हैं। प्रत्येक तीन सेकंड में एक प्रयास और प्रत्येक 40 सेकंड में एक आत्महत्या होती है। भारत में हर साल एक लाख से ज्यादा लोग आत्महत्या करते हैं।
सबसे ज्यादा आत्महत्याएं 15-25 वर्ष के आयु वर्ग में होती हैं। आत्महत्या का कारण मानसिक बीमारी और सामाजिक हो सकता है। जब भी आप किसी व्यक्ति के जीवन में कुछ परिस्थितियों के कारण व्यवहार में भारी बदलाव देखते हैं तो उनसे यह पूछने से न हिचकिचाएं कि क्या वह ऐसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। पूछने से वह वास्तव में वह राहत महसूस करते हैं और आपको बता सकते हैं।
‘रेड अलर्ट’
‘रेड अलर्ट’ के संकेत हैं निराशा, अकेलापन, सामाजिक अलगाव, आत्महत्या की धमकी देना, मूड में अचानक बदलाव, भविष्य के लिए योजना बनाना छोड़ देना, उदासीन हो जाना, मौत के बारे में अजीब बात करना, आत्महत्या के बारे में बात करते हुए वसीयत बनाना।
आपको क्या करना चाहिए
कनेक्ट करें व बातचीत शुरू करें
सक्रियता से सुनें और आलोचना न करें
शांत रहें
व्यक्ति की समस्याओं और दर्द को स्वीकार करें
अपनी कल्पनाएं न करें
बहस, अपमानित, चुनौती न दें
व्यक्ति को अकेला न छोड़ें
पुकार बनेगा आत्महत्या रोकने का हथियार
पु - पूछिए
का- कार्य करिए
र- रक्षा करिए
बातचीत से ही घटेगा आत्महत्या का ग्राफ
समाज के स्तर पर शिक्षकों, धार्मिक शिक्षकों और स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण देकर, संसाधन बढ़ाकर, मानसिक स्वास्थ्य बजट बढ़ाकर, इस विषय पर अधिक पुस्तकें, फिल्में, ऑनलाइन कार्यक्रम कर, मशहूर हस्तियां मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर बात करेंगी तो इन आत्महत्या के बढ़ते ग्राफ में कमी आएगी। 10 सितंबर को आत्महत्या की रोकथाम को बढ़ावा देने, किसी खोए हुए व्यक्ति, पीछे छूट गए परिवार को याद करने और इसे सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के साथ ही रात आठ बजे मोमबत्ती अवश्य जलाएं।