डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सजा सुनाए जाने के बाद डेरा में सन्नाटा पसरा हुआ है। नौबत यहां तक आ चुकी है कि डेरा सच्चा सौदा में हजारों की संख्या में मौजूद दुधारू पशुओं को आधे दामों पर बेचा जा रहा है। सैकड़ों ग्रामीणों ने डेरा के दुधारू पशुआें को खरीद रहे हैं।
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सवा लाख रुपये कीमत की भैंस 60 हजार में और अच्छी नस्ल वाली गायों को 20 से 25 हजार में ग्रामीणों को रास आ रही है। डेरा मुखी को सजा होने के बाद डेरा सच्चा सौदा में सैकड़ों की तादाद में ही सेवादार बचे हैं, ऐसे में हजारों की संख्या में डेरा के अंदर मौजूद दुधारू पशुओं की देखभाल अब संभव नहीं।
अच्छी नस्ल की कीमती हजारों गाय व भैसों के लिए पर्याप्त मात्रा में चारे की व्यवस्था नहीं हो रही और पशुओं को पानी पिलाने से लेकर गोबर उठाने वाला भी नहीं बचा। सभी लोग डेरा छोड़कर जा चुके हैं। ऐसे में डेरा सच्चा सौदा की ओर से दुधारू पशुओं को आधे पौने दामों में बेचा जा रहा है।
डेरा प्रेमियों की ओर से तो यह बात फैलाई जा रही है कि दुधारू पशुओं को नि:शुल्क ही ग्रामीणों को दिया जा रहा है। जो भी ग्रामीण गाय व भैंस ले जाना चाहता है वो ले जा सकता है, लेकिन डेरा से पशु लेकर आए कई ग्रामीणों ने बताया कि भैंस 60 हजार में खरीदी हैं और गाय 25 हजार में। अच्छी नस्ल की भैंस की बाजार में सवा लाख रुपये से कम नहीं।
डेरा में पशुओं की देखभाल अच्छी होती थी इसलिए पशु काफी मात्रा में दूध देते थे। डेरा में हर रोज हजारों लीटर दूध की खपत थी और इसलिए डेरा के अंदर हजारों की संख्या में दुधारू पशु पाले हुए थे। डेरा से पशु खरीदकर लौटे ग्रामीण काफी खुश दिखे।
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उनका कहना था कि इतने कम दाम में देश में कहीं भी अच्छी नस्ल की भैंस व गाय मिलना मुश्किल है। डेरा में कई सौ एकड़ जमीन में ऑर्गेनिक खेती होती थी, जिसमें गोबर की खाद का इस्तेमाल किया जाता था। खाद की सारी जरूरत डेरा के मवेशियों से ही पूरी करता था।