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Chandigarh News: साध्वी यौन शोषण व छत्रपति हत्याकांड की सजा के खिलाफ भी डेरा प्रमुख कर चुका है अपील

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400 अनुयायियों को नपुंसक बनाने का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हाईकोर्ट ने भले ही डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पूर्व डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के आरोप से बरी कर दिया हो, मगर वह जेल में रहेगा। उसे दो अन्य आपराधिक मामलों में सजा सुनाई जा चुकी है। साध्वी यौन शोषण मामले में 20 साल और पत्रकार राम चंद्र छत्रपति में उसे उम्रकैद की सजा हो चुकी है। हालांकि डेरा प्रमुख दोनों फैसलों के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर कर चुका है। वहीं, 400 पुरुषों को नपुंसक बनाने के आरोप का मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है।
दो साध्वियों से यौन शोषण के मामले में उसे अगस्त 2017 में 20 साल की सजा और प्रत्येक पीड़ित को 15 लाख रुपये देने का फैसला अदालत दे चुकी है। इस मामले का खुलासा 2002 में उस दौरान हुआ था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को संबोधित करते हुए एक गुमनाम पत्र भेजा गया था, जिसमें दावा किया गया था पत्र लिखने वाली एक साध्वी है, जो पांच साल तक डेरे में रह चुकी है। पत्र इस बात का उल्लेख किया गया है कि डेरा में राम रहीम महिलाओं को यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर करता है और महिलाओं के ऐसा न करने पर उन्हें और उनके परिवारों को जान से मारने की धमकी भी दी। सितंबर 2002 में हाईकोर्ट ने पत्र में लगाए गए आरोपों की जांच के लिए सीबीआई को आदेश दिया। सीबीआई ने इस मामले में 2007 में चार्जशीट दायर की और इस मामले सुनवाई हुई। एक लंबी सुनवाई के बाद राम रहीम को 20 साल की सजा सुनाई गई।
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वहीं, दूसरे मामला पत्रकार रामचंद्र छत्रपति से जुड़ा है। छत्रपति ने गुमनाम पत्र को अपने अखबार में प्रकाशित किया था। इसके बाद 24 अक्टूबर 2002 को सिरसा में छत्रपति की उनके आवास के बाहर मोटरसाइकिल पर सवार दो लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उनके बेटे अंशुल छत्रपति ने 2003 में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और मामले की सीबीआई जांच की मांग की। इस मामले में पंचकूला की सीबीआई अदालत ने नवंबर 2019 में डेरा प्रमुख और उनके तीन अनुयायियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और किशन लाल के खिलाफ को दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले के खिलाफ डेरा प्रमुख हाईकोर्ट में अपील कर चुका है।
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400 अनुयायियों को नपुंसक बनाने का आरोप
डेरा प्रमुख के खिलाफ 400 अनुयायियों को भी नपुंसक बनाने के आरोप का मामला भी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। जुलाई 2012 में डेरा के अनुयायी हंसराज चौहान ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की। उन्होंने दावा किया कि 1999 से लेकर 2000 के बीच लगभग 400 पुरुषों को नपुंसक बनाने के लिए मजबूर किया गया। दिसंबर 2014 में हाईकोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंप दी और यह अभी भी लंबित है। मामले की आखिरी सुनवाई अप्रैल 2017 में हुई थी।
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