यह अधिकारी 45 दिन स्वेच्छा से अनुपस्थित रहा। वहीं एफआईआर के मुताबिक गैरहाजिर रहते हुए शुक्ला ने मार्च 2017 में कुल वेतन 165546 और अप्रैल 2017 में 168792 रुपये वेतन प्राप्त किया। शिकायतकर्ता ने शुक्ला द्वारा मई 2017 से 19 सितंबर 2017 तक की सैलरी गलत तरीके से लेने का प्रूफ भी पुलिस को दिया है।
सात माह में वन संरक्षक सिर्फ सात दिन गुरुग्राम पहुंचे
हरियाणा सरकार द्वारा जारी बायोमीट्रिक अटेंडेंस प्रथा की भी अधिकारी ने अनदेखी की। अधिकारी सात माह में महज सात दिन ही गुरुग्राम में उपस्थित रहा। इसमें 25 और 26 अप्रैल 2017, 10 और 11 मई 2017, 11, 12, व 15 अगस्त 2017 को हरियाणा विकास निगम गुरुग्राम के वन विश्रामगृह में रुकने की तारीख शामिल हैं।
वहीं गुरुग्राम में ज्वाइनिंग के बाद अधिकारी ने मई 2017, 6 जून, 7 जुलाई, 7 अगस्त, 10 सितंबर 2017, चार बार गुरुग्राम से पंचकूला और पंचकूला से गुरुग्राम की यात्रा की है। इन यात्राओं के मद में अधिकारी ने सरकारी खजाने से 20200 रुपये हासिल किए। एफआईआर में कहा गया है कि वन संरक्षक द्वारा पंचकूला स्थित निवास पर कार्य योजना के कार्यालय के कार्यों को चलाने का प्रमाण टीए बिलों से साबित होता है।
वहीं उपरोक्त मार्ग पर टूर टीए दिखाकर सरकारी वाहन का गलत तरीके से प्रयोग करते हुए पैसा लिया गया है। इसके अलावा मार्च से सितंबर 2017 के बीच अधिकारी ने मुख्य वन संरक्षक विकास मीटिंग का हवाला देते हुए हजारों रुपये ईंधन के रूप में सरकारी खजाने से खर्च किए हैं।
मीटिंग की तारीख 26 अप्रैल 2017 को दिखाई गई है, जबकि इस दिन मुख्य वन संरक्षक द्वारा मीटिंग नहीं बुलाई गई थी। इसके भी प्रमाण का एफआईआर में जिक्र है। इसी प्रकार टीए और डीए के नाम पर कई बार सरकारी खजाने से पैसा लिया गया है।
जीरो टॉलरेंस करप्शन पर दावा करने वाले सीएम को भी नहीं छोड़ा
आरोपी अधिकारी ने 16 जून 2017 को गुरुग्राम से अपनी सरकारी गाड़ी में सोनीपत में सीएम दौरा दिखाया है और उसी दिन रात को 12 बजे टीए बिल में दिल्ली में रुकने का ब्यौरा दिया है। अधिकारी 17 जून 2017 को सुबह 7:30 बजे दिल्ली से निकला। भोंडसी, दिल्ली, करनाल, गुरुग्राम का सीएम का टूर दिखाते हुए 5:30 बजे हेड क्वार्टर गुरुग्राम पहुंचने का प्रमाण दिया है।
आश्चर्य की बात यह है कि गुरुग्राम में स्थित सभी अधिकारी सुबह नौ से शाम छह बजे तक सीएम के प्रोग्राम के लिए भोंडसी में थे। सीएम करीब एक बजे भोंडसी में पहुंचे थे और करीब शाम पांच बजे तक भोंडसी में ही रुके थे।
इस तरह अधिकारी ने वास्तविकता को परे रखते हुए जीरो टॉलरेंस करप्शन का दावा करने वाले सीएम को भी नहीं छोड़ा और सीएम के इस दौरे में गए बिना ही गलत तरीके से टीए हासिल किया। वहीं सरकारी मकान रखने के नाम पर भी सरकारी खजाने से करीब 97901 रुपये हासिल किए हैं।
ये महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां थीं अधिकारी के पास
यह पद काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वन संरक्षक कार्य योजना अधिकारी ने कौन से जिले में किस प्रकार की वन प्रजातियों को उगाया जाना है, कैसा कार्य किया जाना है, बंजर भूमि और अरावली में कैसे पौधों को उगाना है व उनकी किस प्रकार की प्रजातियां तैयार करनी हैं, इसकी जिम्मेदारी होती है।
क्या कहते हैं हरियाणा के प्रधान मुख्य वन संरक्षक
हरियाणा के प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. अनिल कुमार हुड्डा से पूछा गया कि गुरुग्राम के वन संरक्षक कार्य योजना अधिकारी पर वहां के थाने में करप्शन का केस दर्ज हुआ है, इस पर आपने अब तक क्या कार्रवाई की है, तो उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी उन्हें नहीं मिली है। अगर ऐसा मामला है तो अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होगी।
सवाल ये है कि 14 मई को गुरुग्राम के वन संरक्षक कार्य योजना अधिकारी घनश्याम शुक्ला के खिलाफ केस दर्ज हुआ और तीन दिन बाद भी वन विभाग के मुखिया को इसकी भनक तक नहीं लगी, ये बात हजम होने वाली नहीं है।
क्या कहना है घनश्याम शुक्ला का
वन संरक्षक कार्य योजना अधिकारी घनश्याम शुक्ला ने बताया कि सतपाल नाम के व्यक्ति ने जो भी उन पर आरोप लगाए हैं, सभी आरोप निराधार हैं। सतपाल ने इससे पहले सीएम विंडो पर शिकायत दी थी, उसे वर्किंग का बिल्कुल ज्ञान नहीं है। पहले भी विभागीय जांच हो चुकी है। ये सभी आरोप झूठे हैं। अब सूचना मिल रही है कि कोर्ट ने डायरेक्शन दिया है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर प्रॉपर जांच की जाए।