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हरियाणाः कहां खर्च किए 11042 करोड़, महकमे नहीं दे रहे ब्यौरा, महालेखाकार ने उठाया है मामला

Mon, 28 Sep 2020 12:25 PM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, चंडीगढ़

सार

  • राशि खर्च करने के 2072 उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं हुए जमा
  • प्रधान महालेखाकार ने सरकार के समक्ष उठाया है यह मामला
  • उपयोगिता प्रमाण पत्र न देने वाले विभागों की अनुदान राशि रोकी
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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हरियाणा के सरकारी विभाग 11042.39 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब प्रधान महालेखाकार (एकाउंट एंड एंटाइटलमेंटस) को नहीं दे पा रहे। विभागों की तरफ से राशि खर्च करने 2072 उपयोगिता प्रमाण पत्र काफी समय से जमा नहीं हुए हैं। राशि का कोई हिसाब न देने पर प्रधान महालेखाकार ने मामले को वित्त विभाग के समक्ष उठाया है।
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वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद ने प्रधान महालेखाकार की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा न कराने वाले विभागों की अनुदान राशि पर रोक लगा दी है। 2072 उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा कराने के बाद ही संबंधित विभागों को अनुदान की अगली किस्त जारी होगी।

वित्त सचिव ने सभी विभागाध्यक्षों, डीसी, मण्डलायुक्तों व पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय को इस संबंध में पत्र भी लिखा है। टीवीएसएन प्रसाद की तरफ से लिखे पत्र में कहा गया है कि विभाग खर्च राशि का ब्योरा उपयोगिता प्रमाण पत्र में बिना देरी किए प्रधान महालेखाकार को भेजें, इसकी एक प्रति वित्त विभाग को भी भेजी जाए। सरकार ने खर्च की गई अनुदान राशि का लेखाजोखा न देने को गंभीरता से लिया है।
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वित्त सचिव ने विभागों को स्पष्ट कर दिया है कि सरकार की ओर से अनुदान राशि की अगली किस्त उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा होने के बाद ही जारी होगी। अगर प्रमाण पत्र नहीं दिया तो अनुदान पूरी तरह रोक दिया जाएगा। साथ ही राशि का हिसाब न देने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सभी विभागाध्यक्ष अपने अधीनस्थ से खर्च राशि की रिपोर्ट तुरंत तलब कर प्रधान महालेखाकार व सरकार को भेजें।
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सभी अतिरिक्त मुख्य सचिव व प्रधान सचिव को कराया अवगत

वित्त विभाग ने 2072 उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित होने के बारे में सभी अतिरिक्त मुख्य सचिव व प्रधान सचिव को भी अवगत करा दिया है। ताकि वे अपने स्तर भी इस बारे में अपने-अपने विभागों में उचित कार्रवाई अमल में लाएं। महालेखाकार ऑडिट को भी इसकी सूचना दे दी गई है।

वित्त विभाग सभी विभागों से लगातार संपर्क में है और यह जानने की कोशिश की जा रही है कि अगर राशि धरातल पर खर्च की गई है तो फिर उपयोगिता प्रमाण पत्र क्यों जमा नहीं कराए जा रहे। इसमें कोई अनियमितता तो नहीं हुई है, यह भी पता लगाया जा रहा है।
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