कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने मंगलवार को विरोध करने का यह तरीका अपनाया। बता दें कि पांच अप्रैल 2022 को राज्यसभा में तत्कालीन सभापति एम वेंकैया नायडू ने भी कहा था कि सभी सरकारी साइन बोर्डों पर सबसे ऊपर क्षेत्रीय भाषा, उसके बाद हिंदी और फिर अंग्रेजी का प्रयोग होना चाहिए।
अंग्रेजी में बनती हैं नीतियां, गरीबों से जुड़ी योजनाओं के फॉर्म तक अंग्रेजी में
आम बोलचाल में चंडीगढ़ में सबसे ज्यादा हिंदी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बावजूद किसी भी नीति को लागू करने से पहले प्रशासन शहरवासियों से सुझाव मांगता है तो उसके ड्राफ्ट को अंग्रेजी में ही जारी किया जाता है। इसकी वजह से शहर का एक बड़ा वर्ग नीति को समझ पाने में असमर्थ हो जाता है, जबकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी भी सूचना को कम से कम दो भाषाओं में जारी करना अनिवार्य है।
समाज कल्याण विभाग, श्रम विभाग समेत कई ऐसे विभाग हैं जिससे गरीब, मजबूर व कम पढ़े-लिखे लोग जुड़े हैं लेकिन इनकी वेबसाइट अंग्रेजी में हैं। समाज कल्याण विभाग की कई योजनाएं, जिनके नाम तो हिंदी में हैं लेकिन उनके फॉर्म अंग्रेजी में हैं। प्रशासन की तरफ से सरकारी विज्ञप्तियां भी अंग्रेजी में ही आती हैं।
एक साल में वेबसाइट को हिंदी में नहीं कर पाया प्रशासन
शहर में हिंदी के लिए बातें तो बड़ी-बड़ी होती हैं। अफसर सरकारी हो या फिर निजी कार्यक्रम, सभी में हिंदी के विकास की बात करते हैं लेकिन बात जब खुद पर आती है तो वही अफसर अंग्रेजी की तरफ हो जाते हैं। उदाहरण के लिए यूटी प्रशासन ने पिछले साल केंद्र के दिशा निर्देशों के तहत नई वेबसाइट बनाई लेकिन सिर्फ अंग्रेजी में।
हिंदी का एक टैब है लेकिन पिछले एक साल से सिर्फ यही लिखा आ रहा है कि वर्तमान में हिन्दी भाषा में जानकारी उपलब्ध नहीं है, जल्द ही जानकारी उपलब्ध होगी। अंग्रेजी भाषा में देखने के लिए यहां क्लिक करें। इससे समझा जा सकता है कि यूटी प्रशासन हिंदी को लेकर कितना गंभीर है।
चंडीगढ़ में भाषा बोलने वाले लोग
| भाषा |
प्रतिशत |
| हिंदी |
73.6 |
| पंजाबी |
22.03 |
| उर्दू |
01 |
| नेपाली |
0.62 |
| बंगाली |
0.59 |
| तमिल |
0.53 |
| अन्य |
1.63 |
2011 की जनगणना के अनुसार