चंडीगढ़। स्कूल शिक्षा विभाग स्कूलों में मिड डे मील की गुणवत्ता में सुधार और पौष्टिकता को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रहा है। इसी के चलते विभाग ने सरकारी अस्पताल के डायटीशियन के साथ बैठक की। इसमें निर्णय हुआ कि विभाग के अधिकारी डायटीशियन के साथ स्कूलों की मिड डे मील रसोई का औचक दौरा करेंगे और मिड डे मील रसोइयों में प्रतियोगिता करवाएंगे ताकि खाने की गुणवत्ता का पता लगाया जा सके।
स्कूल शिक्षा निदेशक हरसुहिंदर पाल सिंह बराड़ ने बताया कि स्कूलों को पहला, दूसरा और तीसरा बेस्ट किचन का ईनाम भी दिया जाएगा। इसका उद्देश्य खाने की गुणवत्ता और टेस्ट की जांच करना है। शहर के लगभग 116 सरकारी स्कूलों में कलस्टर स्तर पर बनी मिड-डे मील रसोईयों में लगभग 70 हजार के करीब छात्रों के लिए खाना बनाया जाता है।
मिड डे मील में मिलट्स और दूध शुरू करने की योजना
शिक्षा विभाग मिड-डे मील में नए वर्ष में मिलट्स का उपयोग करने की योजना बना रहा है। इसी हफ्ते प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने भी स्कूलों में मिड-डे मील खाने में मिलट्स को शामिल करने का सुझाव दिया था। इसके बाद शिक्षा विभाग ने इस पर काम करना शुरू कर दिया है। वहीं स्कूलों में दूध को भी मिड-डे मील का हिस्सा बनाने पर काम किया जा रहा है। हालांकि कोरोना महामारी से पहले भी मिड-डे मील में दूध, केला या अंडे देने की योजना बनी थी। इसको लेकर वेबसाइट पर टेंडर प्रक्रिया भी शुरू की गई थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण यह अधर में ही रह गया था।