जैसे ही बिजली की रिकॉर्ड स्तर पर खपत बढ़ी तो निगम ने बिजली चोरी के संभावित इलाकों और वर्गों की सूची मांगी। इनमें से उद्योगों, फैक्टरी, गोदामों, ढाबे, आईस फैक्टरी, कोल्ड स्टोर आदि में चोरी की आशंका जताई गई। विभाग की ओर से दोनों दिनों में की गई छापेमारी इन्हीं पर फोकस रही। विभाग की सूचना के अनुसार, सबसे अधिक बिजली चोरी यहीं पर पकड़ी गई। दोनों दिनों में घरेलू और ग्रामीण एरिया में चेकिंग नहीं की गई। विभाग इसके लिए अलग से योजना तैयार कर रहा है।
20 प्रतिशत स्थानों पर पकड़ी गई चोरी
9 और 10 जुलाई को बिजली निगमों की कुल 482 टीमों ने 21 जिलों में छापेमारी की। इस दौरान करीब 20 प्रतिशत स्थानों पर चोरी पकड़ी गई। टीमों ने 29,948 कनेक्शन चेक किए। इनमें से 6015 जगहों पर बिजली चोरी पकड़ी। यूएचबीवीएन में 2660 और डीएचबीवीएन में 3355 स्थानों पर चोरी पकड़ी गई। इन पर करीब 13,985 किलोवाट का लोड था। चोरी करने वाले उपभोक्ताओं पर करीब 2,562 लाख रुपये का जुर्माना किया गया है।
जारी रहेगा चेकिंग अभियान
प्रदेश में बिजली चोरी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भविष्य में भी विभाग लगातार ऐसी कार्रवाई करता रहेगा। हम उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली देने के लिए तैयार हैं। इसके लिए उपभोक्ता को ईमानदारी से बिजली बिल अदा करना चाहिए, तभी यह प्रक्रिया सुचारू हो सकती है। छापेमारी के बाद बिजली की मांग में कमी दर्ज की गई है। - पीके दास, एसीएस, बिजली विभाग।