प्राचीन कला केंद्र चंडीगढ़ में शास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम
प्राचीन कला केंद्र में बुधवार को दिल्ली की शास्त्रीय गायिका पदमजा चक्रवर्ती ने शानदार प्रस्तुति दी, जिसे देखकर दर्शक खूब झूमे। कार्यक्रम का आरंभ उन्होंने राग भोपाली से किया जिसमें आलाप के बाद विलंबित एक ताल से सजी बंदिश पेश की जिसके बोल थे ‘हे प्रभु सुनो दाता’। इस खूबसूरत बंदिश के बाद मध्य लय तीन ताल में ‘महादेव देवा महेश्वराय’ पेश की जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
इसके बाद द्रुत एक ताल में बंदिश ‘आए मन मोह लिया’ पेश करके दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। इसके पश्चात उन्होंने एक ठुमरी पेश की जिसके बोल थे ‘पिया बिनु मोरी कटत नहीं कारी रैन’। इसे सुनकर दर्र्शक मंत्रमुग्ध हो गए। कार्यक्रम का समापन पदमजा ने भैरवी में निबद्ध एक भजन ‘हरि तुम काहे प्रीत लगाई’ पेश करके किया। दर्शकों ने पदमजा की मधुर आवाज की खूब प्रशंसा की।
उनके साथ महमूद खान ने तबले पर, राकेश शर्मा ने हारमोनियम पर संगत की। शास्त्रीय गायिका पदमजा चक्रवर्ती ने प्रारंभिक शिक्षा पंडित दीनानाथ मिश्रा से हासिल की। इसके बाद उन्होंने सुमित्रा गुहा से संगीत की बारीकियां सीखीं। पदमजा चक्रवर्ती ने शास्त्रीय गायिका पदम भूषण गिरिजा देवी से भी संगीत की शिक्षा प्राप्त की। वह इस समय कोलकाता के पंडित समरेश चैधरी से तालीम हासिल कर रहीं हैं।