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Chandigarh News: शुगर मिलों में गन्ना पिराई शुरू होने में देरी ने बढ़ाई किसानों की चिंता

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शुगर मिल नहीं चलने से किसानों की बढ़ी चिंता, कब होगी गेहूं की बिजाई
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इस बार हरियाणा में एक लाख से अधिक हेक्टेयर में की गई गन्ने की बिजाई
तीन शुगर मिलों में शुरू हुई पिराई, चार मिलों के पास 100 दिन का गन्ना भी नहीं
चंडीगढ़। हरियाणा में गन्ने की पिराई में देरी ने गन्ना उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ा दी है। गन्ना नहीं कटने से किसान गेहूं की बिजाई नहीं कर पाएंगे। अभी प्रदेश की दस में से मात्र तीन गन्ना मिलों में ही पिराई सत्र शुरू हुआ है, जबकि सरकारी मिलों की कुल संख्या 10 है। हरियाणा के गन्ना किसानों की मांग है कि जल्द से गन्ना पिराई शुरू की जाए, ताकि गन्ने की फसल काटकर उस जमीन में गेहूं की बिजाई की जा सके।
2021 में गन्ने की पिराई एक नवंबर से शुरू की गई थी, लेकिन इसके बाद से लगातार मिलों में पिराई देरी से शुरू हो रही है। 2022 में चीनी मिलों ने गन्ना पिराई सत्र 15 नवंबर को शुरू किया था, जबकि 2023 में बाढ़ के कारण पिराई सीजन थोड़ा लेट हुआ और 23 नवंबर से शुरू हुआ था। देरी की यह परंपरा इस साल भी जारी है। अभी तक प्रदेश के तीन शुगर मिलों में ही पिराई शुरू हो पाई है। इनमें नारायणगढ़, यमुनानगर और करनाल के शुगर मिल शामिल हैं। दूसरा, चार शुगर मिलों के पास तो 100 दिन का गन्ना भी नहीं है। इनमें रोहतक, पानीपत, गोहाना और कैथल के शुगर मिल शामिल हैं। क्योंकि इन क्षेत्रों में गन्ने का रकबा घटा है और इसका सीधा असर शुगर मिलों पर पड़ना तय है।
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गन्ना किसानों का कहना है कि नवंबर के पहले सप्ताह में मिलों को चालू कर देना चाहिए, ताकि उन्हें गेहूं की फसल के लिए खेत तैयार करने का पर्याप्त समय मिल सके। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं की बुवाई के लिए 10 से 25 नवंबर तक का समय सबसे उपयुक्त होता है। वहीं, शुगरफेड के निदेशक कैप्टन शक्ति सिंह का कहना है कि सभी शुगर मिल को चलाने की तैयारियां जोरों पर हैं। संभावना है कि इस माह तक सभी मिलों को चालू कर लिया जाएगा।
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जल्द पिराई शुरू करने की मांग
भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान का कहना है कि इस साल गन्ने की फसल पर टॉप बोरर, पोक्का बोंग और रूट बोरर जैसे कीटों का हमला हुआ है। उत्पादन लागत तो बढ़ी ही है, लेकिन पैदावार कम हुई है। चीनी मिलों को जल्दी पिराई का काम शुरू कर देना चाहिए, ताकि किसान समय रहते खेत खाली कर सकें, पैसे कमा सकें और गेहूं की फसल बो सकें। गेहूं की देरी से बुआई होने पर पैदावार भी कम होगी।
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