दीपक को मिठाई खिलाते हुए उसके दादा हरिसिंह
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कुछ करने की जिद अगर जुनून में बदल जाए तो सफलता अवश्य ही मिलती है। ऐसा ही कुछ हरियाणा के छुछकवास गांव के दीपक कुमार ने कर दिखाया है। दिव्यांग दीपक कुमार ने आईआईटी के जेइई एडवांस में ओबीसी के दिव्यांग कोटे से देशभर में दूसरा स्थान हासिल किया है। वहीं, दीपक की मुख्य रैंक 8035 है। जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
दिव्यांग दीपक को 6 माह की उम्र में ही लकवे ने घेर लिया था। इसके चलते उसे लेफ्ट पैर व हाथ उसका साथ छोड़ गए। दीपक ने अपनी दिव्यांगता को कभी कमजोरी नहीं बनाया बल्कि इसे अवसर के तौर पर लिया। छुछकवास के आरईडी स्कूल में नर्सरी से पढ़ाई का सफर शुरू करने वाले दीपक ने इसी साल 12वीं कक्षा 80 प्रतिशत अंक के साथ उत्तीर्ण की है। वहीं, जब रविवार को उसके परिजनों को पता चला कि उनके लाडले दीपक ने अपने कोटे में देशभर में दूसरा स्थान प्राप्त किया है तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
दीपक के घर बधाई देने वालों का जमावड़ा लगया तो परिजनों ने सभी का मुंह मीठा करवाया। दिव्यांग दीपक के अनुसार उसने जेइई एडवांस के लिए अपने स्कूल से ही तैयारी की थी, इसके अलावा वह घर पर करीब 3 से 4 घंटे तक पढ़ाई करता था। दीपक के पिता नरेंद्र आर्मी से सेवानिवृत्त के बाद हरियाणा पुलिस में भर्ती हो गए, जो कि आजकल चंडीगढ़ में तैनात हैं। वहीं, उनकी मां गृहिणी हैं तो दीपक की इकलौती बहन मोनिका बीएससी की छात्रा है।