अगर आप डीम्ड यूनिवर्सिटी से स्टडी करते हैं तो यह खबर आपके काम की हो सकती है। मामला हरियाणा की यूनिवर्सिटी से जुड़ा है। गोल्ड फील्ड मेडिकल कॉलेज से सबक ले चुकी हरियाणा की भाजपा सरकार अब डीम्ड विश्वविद्यालयों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है। सरकार की मंशा है कि निजी चिकित्सा शिक्षण संस्थानों की एफिलिएशन सरकार के साथ की जाए। इसे लेकर पिछले दिनों हुई बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने हरी झंडी दे दी है।
हरियाणा में अभी तक चिकित्सा शिक्षा के लिए बड़े बड़े संस्थान तो खुल चुके हैं, लेकिन अभी तक चिकित्सा शिक्षा विभाग उस मुकाम पर नहीं पहुंच पाया है। विभाग का इन संस्थानों पर कोई दबाव न होने के कारण सरकार का बस ऐसे संस्थानों की मनमानी पर नहीं चल पाता था और मेडिकल के दाखिले के लिए विद्यार्थियों को डोनेशन के तौर पर मोटी रकम चुकानी पड़ती है।
फिलहाल भविष्य को देखते हुए सरकार ने राज्य के प्रत्येक जिले में जो मेडिकल कॉलेज खोलने का दावा किया है। उसे पूरा करने के लिए डेरा सच्चा सौदा और मीरी पीरी मेडिकल कॉलेज के लिए एलओआई (लेटर आफ इंटेंड) दे दिया है। शीघ्र ही इन संस्थाओं को मेडिकल कॉलेज के लिए सीएलयू मिल जाएगी। पिछले करीब 12 साल से मीरी पीरी मेडिकल कॉलेज का निर्माण रुका हुआ था।
इसे लेकर पिछले दिनों स्वास्थ्य मंत्री ने पंजाब का दौरा कर यह आश्वासन दिया था कि निर्माण कार्य पूरा करवाया जाएगा। इसके बाद शाहबाद स्थित मीरी पीरी कॉलेज के लिए एसजीपीसी की ओर से 104 करोड़ का बजट रिलीज कर दिया गया है। जबकि करोड़ों रुपये यहां पहले खर्च किए जा चुके हैं।
यह है मेडिकल कॉलेजों की स्थिति
अभी तक हरियाणा में आठ जिले हैं जहां पर चिकित्सा शिक्षा संस्थान हैं। तीन जिलाें पंचकूला, भिवानी और जींद में संस्थान खोलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सरकार का प्रयास है कि सभी इक्कीस जिलों में मेडिकल कालेज खोले जाएं।
अभी तक प्राइवेट मेडिकल कालेजों और डीम्ड विश्वविद्यालयों का यह हाल है कि वे पेपर भी खुद की सेट करते हैं और परीक्षा भी खुद ही लेते हैं। मैंने इस संदर्भ में मुख्यमंत्री से बात की है। ऐसे चिकित्सा शिक्षा संस्थानों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए हम केस बना कर सरकार को भेज रहे हैं।
- अनिल विज, स्वास्थ्य मंत्री हरियाणा