पंजाब यूनिवर्सिटी में फीस बढ़ोतरी को लेकर छात्र संगठनों और यूनिवर्सिटी प्रशासन के बीच पिछले 11 दिनों से लगातार टकराव जारी है। बवाल के बाद पीयू अपना फैसला वापस लेने से इनकार कर रहा है। पीयू ने साफ कर दिया है कि यह फैसला आर्थिक मजबूरियों की वजह से लिया गया है, इसलिए फिलहाल उसे वापस लेने की स्थिति नहीं है। उधर, पीयू के इस फैसले पर छात्र संगठनों ने फिर से ऐलान कर दिया है कि जब तक फीसवृद्धि वापस नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
उधर, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने हैरानी जताते हुए कहा कि अगर विद्यार्थियों द्वारा फीस वृद्धि पर आंदोलन करना देशद्रोह है तो युवाओं को बोलने का कोई अधिकार नहीं है।
वीसी अरुण ग्रोवर ने बुधवार सुबह पूरे पीयू कैंपस का कार से दौरा किया और दोपहर को शार्ट नोटिस पर लॉ आडिटोरियम में फैक ल्टी मेंबर्स के साथ बैठक की। बैठक में वीसी ने फीस वृद्धि के कारणों पर विस्तार से अपनी बात रखी, साथ ही उनसे इस मुद्दे पर समर्थन की अपील की।
उन्होंने बताया कि पीयू एक इंटर स्टेट यूनिवर्सिटी है। विश्वविद्यालय की आय तीन तरह से होती है- इसमें पीयू द्वारा खुद अर्जित आय, पंजाब सरकार का फंड और केंद्र सरकार से मिलने वाला फंड शामिल है। वीसी ने कहा कि लेकिन पिछले कुछ सालों से यूनिवर्सिटी का आर्थिक हालत खस्ता हुई है। इस पर हाईकोर्ट ने स्वत:संज्ञान लेते हुए यूजीसी को अतिरिक्त ग्रांट देने के आदेश दिए थे। लेकिन इस मसले पर यूजीसी अब सुप्रीम कोर्ट चली गई है, लिहाजा उसके फैसले का इंतजार करना पड़ेगा।
शिक्षकों से बात करते हुए वीसी
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वीसी अरुण ग्रोवर ने सफाई दी कि ऐसा नहीं है कि सभी विषयों की फीस मेें बेतहाशा वृद्धि की गई है। छात्रों को सिर्फ कुछ विशेष विषयों में ये वृद्धि ज्यादा लग रही है। उन्होंने कहा कि पीयू के आर्थिक संकट को देखते हुए यह फैसला फिलहाल उचित है।
दूसरी ओर, विद्यार्थी परिषद के हरमनजोत सिंह, एनएसयूआई के कैंपस प्रेसिडेंट नवदीप बब्बी और पीयूएससी के प्रेसिडेंट निशांत कौशल ने कहा कि छात्रों का फीसवृद्धि के खिलाफ आंदोलन पूरी तरह से जायज है। इस फैसले को वापस लेने तक उनका आंदोलन व भूख हड़ताल जारी रहेगी।
पीयू में हिंसा से विदेश में चिंता
वीसी अरुण कुमार ग्रोवर ने बताया कि सोशल मीडिया में पीयू में खूनखराबे के वीडियो वायरल होने के बाद आस्ट्रेलिया, जापान, चीन से लोगों ने उनको फोन कर मामले की जानकारी ली और हिंसा पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस घटना से विदेश में भी पीयू की छवि खराब हुई है। किसी को ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए, जिससे पीयू की छवि बिगड़े।