हरियाणा की राजनीति में अब नये चेहरे सियासी करतब दिखाने को तैयार हैं। इन युवा तुर्कों में से कुछ को मुकाम हासिल हो चुका है और कुछ प्रयासरत हैं।
देवीलाल परिवार की चौथी पीढ़ी से दुष्यंत चौटाला लोकसभा चुनाव में हिसार सीट से मैदान मार चुके हैं। इनके अलावा इसी परिवार के दिग्विजय, करण और अर्जुन चौटाला पार्टी के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र हुड्डा राजनीति में अपनी जड़ें जमा चुके हैं और इस समय रोहतक से सांसद हैं। इसी प्रकार पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल की तीसरी पीढ़ी भव्य विश्नोई ने अपने पिता कुलदीप बिश्नोई की पार्टी हजकां के चुनाव प्रचार की कमान थाम लिया है।
चुनाव नई पीढ़ी के लिए राजनीति का प्लेटफार्म
यह विधानसभा चुनाव इस नई पीढ़ी के लिए राजनीति का प्लेटफार्म साबित होगा। हालांकि राजनीति का ककहरा इन लोगों ने किशोर अवस्था में ही सीख लिया था, लेकिन पढ़ाई पूरी करने के चक्कर में राजनीति से कुछ दिन दूर रहना पड़ा।
अब यह युवा तुर्क राजनीतिक मैदान में भाषण देने से लेकर रैलियों को संबोधित करने का जिम्मा उठाए हैं। पार्टियों की होने वाली बड़ी रैलियों में इन युवा नेताओं को भी अपना प्रदर्शन करने का मौका मिल रहा है।
बस अंदाज अलग है विदेश से डिग्री लेकर चुनावी मैदान में कूदे यह नेता पुत्र राजनीतिक हथकंडे तो सीख ही रहे हैं। साथ ही अपनी पढ़ाई लिखाई के दम पर राजनीति की दिशा बदलने का भी दम रखते हैं।
दुष्यंत चौटाला
लोकसभा चुनाव में हजकां सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई को पछाड़ कर संसद पहुंचे दुष्यंत आठ साल की उम्र में ही देवीलाल के लिए चुनाव प्रचार करने रोहतक गए थे।
यहां से राजनीति की एबीसीडी सीखने के बाद दुष्यंत ने कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी से बैचलर आफ साइंस इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री हासिल की।
27 जनवरी 2013 को पीजी की पढ़ाई के लिए उन्हें अमेरिका जाना था, लेकिन दादा ओम प्रकाश चौटाला और पिता अजय चौटाला के जेल जाने के बाद वे यहां सक्रिय हो गए। राजनीतिक विरासत के धनी दुष्यंत ने हिसार लोकसभा में ऐसा दांव लगाया कि कुलदीप बिश्नोई को पटखनी दी।
दिग्विजय चौटाला, कर्ण और अर्जुन चौटाला
लंदन से पढ़ाई कर रहे दिग्विजय चौटाला को पारिवारिक संकट के कारण बीच में ही आना पड़ा। राजनीति की शिक्षा परिवार से ही लेने के बाद उन्होंने विधानसभा चुनाव में प्रचार की कमान संभाल ली है।
युवाओं में लोकप्रिय दिग्विजय कम उम्र के कारण भले ही विधानसभा चुनाव न लड़ सकें, लेकिन इनेलो को जिताने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं।
कर्ण चौटाला और अर्जुन चौटाला ऐलानाबाद से विधायक अभय सिंह चौटाला के पुत्र हैं। विदेश में पढ़ाई बीच में छोड़ कर दोनों युवाओं को बीच में ही वापस आना पड़ा।
पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता बताते हैं कि रोड़ी केउपचुनाव में अर्जुन चौटाला ने अपने पिता के साथ चुनाव प्रचार कर वोट मांगने शुरू कर दिए थे।
जिसमें गांव की बुजुर्ग महिलाओं ने उन्हें पूरा दुलार दिया था। चौटाला परिवार के सभी युवाओं ने राजनीतिक दीक्षा अपने परिवार केसदस्यों से ही ग्रहण की है।
दीपेंद्र हुड्डा
लोकसभा चुनाव में मोदी की लहर के बावजूद हरियाणा से एकमात्र कांग्रेस की सीट रोहतक संसदीय क्षेत्र से दीपेंद्र हुड्डा की निकली। दादा रणबीर सिंह हुड्डा संयुक्त पंजाब में मंत्री रहे। दीपेंद्र हुड्डा अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं जो राजनीति में दम दिखा रहे हैं। पढ़ाई पूरी कर दीपेंद्र अब राजनीति में जौहर दिखा रहे हैं।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र हुड्डा लोकसभा चुनाव में तबियत खराब होने केकारण अधिक प्रचार नहीं कर सके, लेकिन विधानसभा चुनाव की कमान उन्होंने संभाल ली है। 24 अगस्त की पानीपत रैली में भीड़ जुटाने में दीपेंद्र की अहम भूमिका रही।
भव्य बिश्नोई:
राजनीति की दीक्षा ले रहे कुलदीप बिश्नोई के पुत्र भव्य बिश्नोई अभी 19 वर्ष के हैं। वे हावर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट होकर अभी लौटे हैं। हजकां की घोषणा पत्र कमेटी के मेंबर रहे भव्य अपने पिता के पिछले चुनाव में तो साथ देते ही रहे हैं। अभी भी वे हजकां के लिए छात्रों को अपने प्रभावी भाषण से जोड़ने का काम कर राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे हैं।