बैठक में सीसीटीवी कैमरों पर दिया जाता रहा जोर
विश्वसनीय सूत्रों ने बैठकों में केवल सीसीटीवी कैमरे लगाने जैसी बातों पर चर्चा होती रही, लेकिन चारे की आपूर्ति, लोहे के एंगल, रख-रखाव और अन्य बुनियादी समस्याओं पर कभी गंभीर चर्चा नहीं हुई। अब सवाल उठ रहा है कि क्या वास्तव में गायों को पूरा चारा मिल रहा था या फिर कागजों में ही सब कुछ सही दिखाया जा रहा था। हालांकि रायपुर कलां में जिंदा गायों की स्थिति बेहद खराब है। गायों की मौत की खबर सामने आने के बाद बुधवार को विशेष बैठक बुलाई गई, जिसमें एमएचओ इंद्रप्रीत कौर भी मौजूद थीं। अधिकारियों से जवाब-तलब किया गया कि यदि कोई समस्या थी तो पहले क्यों नहीं बताई गई। सूत्रों का कहना है कि हर बैठक में यही कहा जाता रहा कि कोई दिक्कत नहीं है जबकि हकीकत कुछ और थी।
केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने किया था गोशाला का उद्घाटन
रायपुर कलां की यह गोशाला लगभग पांच एकड़ जमीन में बनी है। 8 मई 2023 में इसका उद्घाटन केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने किया था। अब यह भी जांच का विषय है कि कितने बछड़ों को दबाया गया, उसका कोई रिकॉर्ड मौजूद है या नहीं और क्या कभी इसकी विधिवत रिपोर्टिंग हुई। प्रशासनिक स्तर पर यह भी चर्चा है कि लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ जल्द एफआईआर दर्ज की जा सकती है।
एक दिन में एक गाय को 18 से 20 किलो चारा मिलने का दावा
सूत्रों के अनुसार एक गाय को रोजाना 18 से 20 किलो चारा दिया जाना दर्शाया जाता था। एमएचओ इंद्रप्रीत से भी कई बार चारे की स्थिति को लेकर जानकारी ली जाती रही। यदि वास्तव में गोशाला में कोई दिक्कत थी तो बैठकों में इसे क्यों नहीं उठाया गया।
पहले दिन 10 गायों का पोस्टमार्टम, रिपोर्ट से खुलेगा मौत का कारण
बुधवार को 10 गायों का पोस्टमार्टम कराया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा होगा। इसके अलावा विसरा जांच के लिए सैंपल भी भेजे जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच शुरू होते ही सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएंगे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किस-किस कर्मचारी की ड्यूटी थी और किस स्तर पर लापरवाही हुई। पुलिस जल्द लापरवाही बरते वाले कर्मचारियों से पूछताछ कर सकती है।