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सुभाषचंद्र बोस के साथी का निधन, अंतिम यात्रा

Thu, 01 Jan 2015 01:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हांसी
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बांडाहेड़ी में स्वतंत्रता सेनानी चंदन सिंह के निधन पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। प्रशासन की तरफ से तहसीलदार साहब राम बिश्नोई और सदर थाना प्रभारी जगबीर सिंह शामिल हुए। आजाद हिंद फौज के सिपाही रहे चंदन सिंह 96 वर्ष के थे।
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हिसार पुलिस की टुकड़ियों ने स्वतंत्रता सेनानी के सम्मान में फायर कर श्रद्धांजलि दी। चंदन सिंह का जन्म 1919 में हुआ था। उन्हें हिंदी के साथ कई अन्य भाषाओं का भी ज्ञान था। चंदन सिंह ब्रिटिश आर्मी में 1937 में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे।

उन्होंने ब्रिटिश आर्मी में लगभग तीन वर्ष तक अपनी सेवाएं दीं और 1940 में ये सुभाषचंद्र बोस के संपर्क में आए और उनसे प्रभावित होकर आजाद हिंद फौज में सिपाही के पद पर भर्ती हो गए। उनके भर्ती होने के एक वर्ष पश्चात ही देश में अंग्रेजों के खिलाफ आजादी का बिगुल बज गया और इसमें उन्होंने अपना पूरा योगदान दिया।
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चंदन सिंह जापान के साथ हुए युद्ध के दौरान भी सिंगापुर जेल में रहे और अंग्रेजों की अनेक यातनाएं सहीं। गमगीन माहौल में पूर्व सरपंच एवं बड़े बेटे जगबीर सिंह ने स्वतंत्रता सेनानी के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी। इसके अतिरिक्त श्रद्धासुमन अर्पित करने वालों में सरपंच हिम्मत सिंह, पूर्व सरपंच जयपाल, राजेंद्र पटवारी, किरदारा नंबरदार सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग शामिल थे।

चंदन सिंह के बड़े बेटे पूर्व सरपंच जगबीर सिंह ने बताया कि उनके पिता देशभक्त होने के साथ खुशमिजाज और मिलनसार थे। उन्होंने बताया कि उनके पिता बताते थे कि अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह के दौरान उन्होंने रंगून, कोलकाता, मुलतान  (पाकिस्तान) में जेल काटी।

देशभक्ति गीत सुनाकर छोड़ी अंतिम सांस
इस दौरान उन्हें फांसी के घर में ले जाकर डराना, समुद्र के बीच में ले जाकर पानी में डुबोना, कांच के शीशों में ले जाकर डराना, रोकना व करंट लगाने के अलावा खाने में चावलों में कंकर-मिट्टी डालना आदि यातनाएं दी जाती थीं।

उन्होंने बताया कि छोटे भाई की बांहों में अंतिम सांस लेने से 10 मिनट पहले एक देशभक्ति का गीत सुनाया, जो अकसर खाना खाने के बाद सुनाते थे। गांव में स्वतंत्रता सेनानी के दाह संस्कार के समय पूरे गांव में माहौल गमगीन था। स्वतंत्रता सेनानी अपने पीछे पूरा भरा परिवार छोड़कर गए हैं।

इनमें चार पुत्र, चार पुत्रियां, आठ पोते, चार पोती, दस दोहते और छह दोहती शामिल हैं। इनका दूसरा बेटा आनंद सिंह एक बैंक में एलबीओ के पद पर है और तीसरा बेटा डॉक्टर असबीर सिंह वीएलडी के पद पर कार्यरत है।

सबसे छोटा बेटा खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग में सीनियर योगा कोच के पद पर तैनात है। अपने पिता की देशभक्ति के जज्बे को देखते हुए इनके बड़े बेटे जगबीर सिंह सेना में भर्ती हुए और इन्होंने पांच वर्ष तक देश सेवा की।
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