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घातक : हुक्के का 45 मिनट का सेशन 50 सिगरेट की कश के बराबर

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चंडीगढ़। हुक्के का 45 मिनट का सेशन लेने वाला व्यक्ति एक बार में 50 सिगरेट के कश के बराबर तंबाकू ले लेते हैं। उन्हें इसका पता भी नहीं चलता। फ्लेवर वाला हुक्का और भी ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि फ्लेवर के चक्कर में युवा एक के बजाय दो से तीन सेशन तक ले लेते हैं। वहीं, अगर इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट पर गौर किया जाए तो इसके दुष्प्रभाव को देखते हुए ही 2020 में इसे बैन कर दिया गया था क्योंकि इसमें 95 प्रतिशत निकोटिन होता है जबकि सामान्य सिगरेट में निकोटिन की मात्रा 1 से 2 प्रतिशत होती है। यह जानकारी पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा केंद्र के डॉक्टर सोनू गोयल ने तंबाकू निषेध दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार को विभाग में आयोजित प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि तंबाकू को जहर अधिनियम के तहत जहर माना गया है। इसे चूहे मारने वाली दवा के सामान रखा गया है। फिर भी युवा ही नहीं हर वर्ग के लोग इसका सेवन कर रहे हैं। डॉ. सोनू ने बताया कि तंबाकू की लत छुड़ाने के लिए महीनों तक काउंसिलिंग की जाती है। इसे एक बार में नहीं छोड़ा जा सकता। धीरे धीरे मात्रा कम कर इसकी लत को कम किया जाता है। डॉ. सोनू का कहना है कि तंबाकू ही नहीं कोई भी नशा छोड़ने के लिए सबसे पहले निर्णय लेना जरूरी है। उसके बाद किसी एक ऐसे अपने की तलाश कीजिए जिससे उसे निर्णय को साझा कर सकें। वे अपना घर या बाहर का व्यक्ति हो सकता है।
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तंबाकू छोड़ने के बाद ऐसे होता है सुधार
24 घंटे में हार्ट रेट सामान्य होने लगता है।
7 दिन में रिस्पेरेटरी सिस्टम में सुधार होने लगता है।
5 साल में हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है।
10 साल में फेफड़े सामान्य होने लगते हैं।
28 मई को पीजीआई से सुखना लेक तक निकाली जाएगी जागरूकता रैली
विश्व तंबाकू निषेध दिवस के उपलक्ष्य में पीजीआई के रिसोर्स सेंटर फॉर टोबैको कंट्रोल की तरफ से अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर 28 मई को साइक्लोथॉन और वाकेथॉन का आयोजन किया जा रहा है। इसमें पीजीआई से सुखना लेक तक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। कार्यक्रम में पीजीआई, चंडीगढ़ और पंजाब स्वास्थ्य विभाग, आईएमए, पीयू, होमी भाभा कैंसर संस्थान के डॉक्टर व पैरामेडिकल भाग लेंगे।
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