अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब में विभिन्न स्थानों पर सतलुज नदी में हो रही डी-सिल्टिंग को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को विश्वास दिलाया कि याचिका लंबित रहते डी-सिल्टिंग के लिए जारी टेंंडरों को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा। सरकार की इस अंडरटेकिंग से अब सतलुज में डी-सिल्टिंग का काम अटक गया है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को अगली सुनवाई पर इसके लिए ली गई मंजूरियों का पूरा रिकॉर्ड भी सौंपने का आदेश दिया है।
अमृतसर के सहज प्रीत सिंह ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर बिना जिला सर्वे रिपोर्ट के डी-सिल्टिंग के नाम पर हो रहे खनन पर रोकने की मांग की थी। याची ने कहा कि भारी मशीनों का डी-सिल्टिंग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। वर्तमान में सावन का मौसम है और नदियां ऊफान पर हैं ऐसे में इस समय डी-सिल्टिंग का टेंडर जारी करना सही नहीं है।
याची ने बताया कि इन परिस्थितियों के बावजूद पंजाब सरकार ने इसके लिए टेंडर जारी कर दिया है। कोर्ट को बताया गया कि याची को तीसरी बार इस मामले में अदालत की शरण लेनी पड़ी है। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह मामला पर्यावरण से जुड़ा है और इस मामले में जल्द कार्रवाई जरूरी है।
कोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा कि क्यों इस कार्य के लिए अनुमति अनिवार्य है और यदि है तो क्यों पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार से आवश्यक मंजूरियां ली हैं। पंजाब सरकार ने कहा कि इस मामले में उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि याची इस मामले में अंतरिम आदेश की मांग कर रहा है क्या हम टेंडर पर रोक लगा दें। इस पर पंजाब सरकार ने कोर्ट को विश्वास दिलाया कि याचिका लंबित रहते टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं की जाएगी।