शहर के निकटवर्ती गांव दारास्लाम की आधी आबादी हाइड्रोलिक रिसर्च सेंटर की जमीन पर बसी हुई है। सेंटर के अफसरों ने जमीन पर कब्जे के लिए निशानदेही शुरू कर दी है। जब यह कवायद शुरू हुई तो वहां बसे ग्रामीणों के होश उड़ गए।
उनका कहना था कि निशानदेही की कवायद शुरू होने पर उन्हें पता चला कि जिस स्थान पर वे बसे हैं, वह जमीन उनकी नहीं है। 120 घरों की आबादी वाले इस गांव के लगभग 70 घर इस निशानदेही की जद में आ रहे हैं। ऐसे में उनकी रातों की नींद उड़ गई है। बुधवार को न्याय की गुहार लगाते हुए ग्रामीणों ने डीसी दफ्तार के सामने धरना प्रदर्शन किया।
कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के प्रवक्ता राज कुमार के नेतृत्व में डीसी कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकार उनका गांव उजाड़ने पर तुली हुई है। प्रदर्शन करने वालों में शामिल देवी सैनी, तृप्ता देवी, राज कुमार, डा. सुरेंद्र गिल, केवल कालिया, हरबंस लाल, विक्रमजीत, लखविंद्र सिंह, तिलक राज सहित अन्य ने बताया कि वह लोग देश विभाजन के बाद इस गांव में आकर बसे थे।
इससे पहले यहां पर पाकिस्तान गए मुस्लिम लोग रहते थे। उन्होंने बताया कि अब 66 वर्ष के बाद अब उन्हें बताया जा रहा है कि यह जमीन हाइड्रोलिक रिसर्च सेंटर की है, जोकि गलत है। उन्होंने बताया कि उनके राशन कार्ड से लेकर बिजली के बिल व अन्य सभी पत्र इसी पते के बनेे हुए हैं। जिस ढंग से उन्हें अपने घर से जुदा करने की कवायद चल रही है, उससे यह साफ जाहिर होता है कि उनके गांव को उजाड़ दिया जाएगा। उन्होंने डिप्टी कमिश्नर से इसे तुरंत रोकने की मांग की है।
इस संबंध में हाइड्रोलिक रिसर्र्च सेंटर मलिकपुर के एसडीओ सुरेंद्र कलेर का कहना कि यह जमीन सेेंटर की है। सरकारी निर्देश के तहत जमीन की निशानदेही की जा रही है, जोकि अब भी जारी है। उन्होंने बताया कि इसकी रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।