पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि भले ही पति को उसके माता-पिता से अलग रखना क्रूरता नहीं है लेकिन उनकी बेइज्जती करना बहू की क्रूरता मानी जाएगी। इस टिप्पणी के साथ ही होशियारपुर फैमिली कोर्ट द्वारा जारी तलाक के आदेश को चुनौती देने वाली पत्नी की याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी।
याचिका दाखिल करते हुए पत्नी ने कहा था कि उसका विवाह 2004 में हुआ था जिसके बाद से ही परिवार वालों ने उसे परेशान करना आरंभ कर दिया। उसे कई बार पीटा गया और अक्सर दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया। इस पर पति की ओर से हाईकोर्ट में बताया गया कि याची शादी के बाद से ही पति को अपने माता-पिता से अलग रहने के लिए दबाव बनाने लगी थी।
जब ऐसा नहीं हुआ तो उसने अपने सास-ससुर को अपमानित करना आरंभ कर दिया। कई बार गैर लोगों को मौजूदगी में सरेआम उनको बेइज्जत करती। पति ने बहुत से प्रयास किए कि उसका घर न टूटे, लेकिन याची ने हर बार इन प्रयासों को विफल कर दिया। याची की सरकारी नौकरी लगी और वह नियुक्ति के स्थान पर 2008 में आ गई।
याची का साथ देने के लिए पति ने भी अपना तबादला करवा लिया लेकिन फिर भी पत्नी की हरकतें बंद नहीं हुईं। इसके बाद महिला ने पति के खिलाफ पुलिस में भी शिकायत दे दी। हाईकोर्ट ने दोनो पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि भले ही आज के बदलते परिवेश में पति को उसके मां-बाप से अलग रखने की बात क्रूरता न हो लेकिन उनकी बेइज्जती करना निश्चित तौर पर क्रूरता है। हाईकोर्ट ने पत्नी की याचिका खारिज करते हुए तलाक के आदेशों को बरकरार रखा है।