सुबह पांच बजे उठाना और रात साढ़े 11 बजे तक कठिन मेहनत करना। नवरात्र में रामलीला मंचन के कारण यह समय आधा घंटा और बढ़ जाता है। सेक्टर-28 के गढ़वाल रामलीला मंडल (बिजली बोर्ड) में सीता का किरदान निभानेवाली सलोनी राणा का यह शेड्यूल है।
वह पहले सेक्टर-31 के एक स्कूल में डांस सिखातीं हैं, फिर सेक्टर-15 के चिल्ड्रन होम में बच्चों को डांस की ट्रेनिंग देने पहुंच जाती हैं। शाम पांच बजे से टैगोर थियेटर में नाटक का रिहर्सल करती हैं। यह सिलसिला यहीं नहीं थमता है। रात आठ बजे से सेक्टर-28 में रामलीला की रिहर्सल करने पहुंचती हैं।
यहां से वह 11:30 बजे सेक्टर-33 स्थित अपने घर पहुंची हैं। सलोनी बताती हैं कि रामलीला का मंचन जब शुरू होगा तो उन्हें घर पहुंचने में और देर हो जाती है। यह सिलसिला पूरे नवरात्र चलता है। जब उनसे पूछा गया कि इतनी जिम्मेदारियां एक साथ कैसे निभा लेती हैं तो वह कहती हैं जीवन में मेहनत तो करनी ही पड़ेगी। इससे क्या डरना।
यह मैंने अपनी मां से सीखा है। सलोनी का कहना है कि कलाग्राम में आयोजित होने वाले क्रॉफ्ट मेले में उन्हें सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार भी मिल चुके हैं।
कई बार घर पर ही स्क्रिप्ट
कई बार बिजी शेड्यूल और तबीयत कम ठीक होने पर डायरेक्टर मुकेश शर्मा की मदद से सलोनी घर पर ही रामलीला की स्क्रिप्ट तैयार करती हैं। वे पिछले एक महीना से रामलीला की रिहर्सल के लिए सेक्टर-28 पहुंचती हैं। सलोनी बताती हैं कि रामलीला में वे बिना मेकअप के ही अधिकतर सीन करती हैं।