फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंजाब चुनावः दलित वोट बैंक पर सभी की नजर, निभायेंगे निर्णायक भूमिका

Mon, 09 Jan 2017 05:05 PM IST
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
पंजाब विधानसभा चुनाव
विज्ञापन
पंजाब विधानसभा चुनाव 2017 सिर पर हैं और हर बार की तरह इस बार भी सभी की नजर दलित वोट बैंक पर लगी हुई है। यूपी और पंजाब समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव से ऐन पहले सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई धर्म व जाति के आधार पर वोट मांगने पर रोक वाली व्यवस्था ने राजनीतिक दलों के लिए भले ही एक लकीर खींच दी हो, लेकिन वर्षों से जाति-धर्म आधारित राजनीति करने वाली पार्टियों के तौर-तरीकों में तत्काल बदलाव आसान नहीं लगता।
विज्ञापन


वजह यह है कि खास कर क्षेत्रिय दल लंबे समय से धर्म-जाति अमीर-गरीब, शहरी-ग्रामीण, उद्योगपति-बेरोजगार और अगड़े-पिछड़ों के तौर पर जनता का वर्गीकरण कर रणनीति के तहत ही चुनाव लड़ते रहे हैं। पंजाब भी इससे अछूता नहीं है। यहां इस बार के चुनाव में भी जातिगत समीकरण का सबसे अहम आधार दलित वोटों को माना जा रहा है।

दलों के मेनिफेस्टो में तवज्जो

कांग्रेस ने जारी किया पंजाब के लिए चुनावी घोषणा पत्र - फोटो : self
पंजाब में सभी प्रमुख और स्थानीय पार्टियां समाज के विभिन्न वर्गों के हिसाब से अपनी रणनीति बना चुकी हैं। हो सकता है सुप्रीम कोर्ट के डंडे के डर से सियासी दल प्रचार के दौरान किसी वर्ग विशेष का उल्लेख भले न करें, लेकिन दलों के मेनिफेस्टो में हर वर्ग के लिए अलग-अलग सुविधाओं की घोषणा अवश्य होगी।

भले ही पंजाब में इस बाद के चुनाव में बेरोजगारी, कृषि संकट, किसानों की आत्महत्याएं, असफल अर्थव्यवस्था, कानून-व्यवस्था की बिगड़ी हालत, 1984 सिख विरोध दंगे, एसवाईएल, नशाखोरी और नशा तस्करी के अलावा पंजाबी एनआरआई की समस्याएं प्रमुख मुद्दे हों, लेकिन सत्ता तक पहुंचने के चुनावी खेल में शह और

आबादी में 34 प्रतिशत हिस्सेदारी दलितों की

पंजाब विधानसभा चुनाव
सिख बहुल आबादी वाले इस प्रांत की राजनीति में हमेशा से जाट सिखों का प्रभाव रहा है। हालांकि राज्य की आबादी में 34 प्रतिशत हिस्सेदारी दलितों की है, जो भारत के किसी भी अन्य राज्य के लिहाज से सर्वाधिक है। दूसरी खास बात यह है कि पंजाब के दलित सभी धर्मों में विभाजित हैं।

राज्य की सिख आबादी में करीब 57 प्रतिशत दलित हैं, तो हिन्दू आबादी में 38 प्रतिशत और मुस्लिम व ईसाई आबादी में भी 2 व 1 फीसदी दलित शामिल हैं। राज्य में दलितों की 37 उप-जातियां हैं।

साल 2011 के जनसंख्या के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 32 फीसदी ओबीसी, 31.94 फीसदी अनुसूचित जाति, 41 फीसदी ऊंची जातियां और 3.8 फीसदी अन्य जातियों के लोग हैं। इस तरह राज्य के 117 विधानसभा क्षेत्रों में से 30 प्रतिशत सुरक्षित सीटों के चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका दलित समुदाय की ही रही है।

डेरों से भी है दलित वर्ग का जुड़ाव

महिलाओं की कतार
पंजाब में फिरोजपुर, नवांशहर, जालंधर, मुक्तसर, फरीदकोट, तरनतारन और कपूरथला जिले दलित बहुल हैं। सूबे के दोआबा बेल्ट में जो दलित हैं, वे पंजाब के दूसरे हिस्सों से अलग हैं। वजह यह है कि इनमें से अधिकांश परिवारों का कम से कम एक सदस्य एनआरआई है।

इस नाते यह आर्थिक रूप से काफी संपन्न हैं। इनका असर फगवाड़ा, जालंधर और लुधियाना के कुछ हिस्सों में है। खास बात यह भी है कि पंजाब में दलित वोट अलग-अलग वर्गों में बंटा है। रविदासी दलित हैं तो वाल्मीकि दलित भी।

गांवों में बसे दलितों में एक बड़ा वर्ग प्रदेश के विभिन्न धार्मिक डेरों से जुड़ा है। ऐसे में चुनाव के वक्त यह डेरे भी अहम भूमिका निभाते हैं। इस बार भी मुख्यमंत्री बादल, उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल, कैप्टन अमरिंदर सिंह, अरविंद केजरीवाल सरीखे बड़े नेता विभिन्न डेरों में माथा टेक आए हैं।

लुभाने की कवायद में आप सबसे आगे

सीएम ने मंच से चलाए सियासी तीर - फोटो : अमर उजाला
पंजाब में अब तक हुए विधानसभा चुनाव में शिअद-भाजपा गठबंधन और कांग्रेस के बीच यह वोट बंटता रहा है और इसी के सहारे कभी गठबंधन तो कभी कांग्रेस को सत्ता सुख मिला है। हालांकि इस बार स्थिति अलग है। विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) भी बड़े दावेदार के रूप में उतरी है।

मौजूदा हालात यह हैं कि प्रदेश के दलित बहुल इलाकों में आप ने बड़ी मजबूती से दस्तक दी है। पार्टी ने दलित समुदाय के लोगों को अपने संगठन में कई अहम स्थान भी दिए हैं। यहां तक कि टिकट वितरण में भी दलित वर्ग से कोई भेदभाव नहीं किया गया है।

विस चुनाव के लिए मेनिफेस्टो जारी करने में अन्य दलों से आगे रही आप ने प्रदेश में डोर-टु-डोर अभियान के तहत दलित वर्ग की समस्याओं का अध्ययन कर दलितों की कल्याणकारी योजनाओं का अलग से मेनिफेस्टो भी जारी किया है। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल तो चुनाव जीतने पर दलित उप मुख्यमंत्री बनाए जाने का ऐलान भी कर चुके हैं।

 
विज्ञापन

भाजपा भी कम नहीं

विजय सांपला - फोटो : फाइल फोटो
आप के अलावा अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों पर नजर डालें तो सभी दल प्रभावशाली दलित क्षत्रपों को अपने संगठन में ऊंचे पद देकर दलित वोट लुभाने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा ने विजय सांपला को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है, जो दलित हैं।

पंजाब सरकार की ओर से पिछले महीने 200 करोड़ रुपये की लागत से भगवान वाल्मीकि मंदिर (रामतीर्थ) में मूर्ति की स्थापना की गई है। इसे शिअद-भाजपा गठबंधन को दलित समुदाय के हितैषी के रूप में साबित करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

वहीं, कांग्रेस के लिए सत्ता तक पहुंचने का मार्ग हमेशा से दलित वोटरों की ओर से ही तैयार किया जाता रहा है, जो पिछले चुनाव से कांग्रेस से दूरी बनाए हुए है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें