विश्व साइकिल दिवस पर साहिबाबाद स्थित साइकिल कंपनी एटलस द्वारा प्लांट में उत्पादन बंद (ले ऑफ) करने के फैसले से लुधियाना के साइकिल कारोबारी सकते में हैं। लुधियाना के कई कारोबारियों के करोड़ों रुपये कंपनी की तरफ बकाया हैं। साइकिल निर्माण के लिए ज्यादा पार्ट्स लुधियाना से ही सप्लाई किए जा रहे थे। ऐसे में सभी को यह चिंता सता रही है कि उनका पैसा कैसे मिलेगा।
हालांकि लुधियाना के कारोबारियों की चिंता को देखते यूनाइटेड साइकिल पार्ट्स मैन्यूफेक्चरर्स एसोसिएशन ने एटलस कंपनी से बातचीत शुरू कर दी है, ताकि किसी तरह पैसे को निकाला जा सके। साइकिल निर्माण की नामी कंपनी एटलस ने तीन जून को अपने साहिबाबाद स्थित प्लांट में उत्पादन का काम बंद कर दिया था।
इससे पहले कंपनी की तरफ से मध्य प्रदेश के मालनपुर और हरियाणा के सोनीपत स्थित प्लांट को बंद किया जा चुका है। साहिबाबाद प्लांट को अभी ले ऑफ करने की बात कही जा रही है। ले ऑफ यानी कंपनी के पास उत्पादन के लिए पैसा नहीं है, उस स्थिति में कंपनी कर्मचारियों की छंटनी करने की जगह अतिरिक्त काम न कराकर सिर्फ उनकी हाजिरी लगाती है और आधे वेतन का भुगतान करती है।
कंपनी पर 100 करोड़ से कम की है देनदारी
यूनाइटेड साइकिल पार्ट्स मैन्यूफेक्चरर्स एसोसिएशन प्रधान डीएस चावला ने बताया कि फैक्टरी बंद होने की खबर से उन्हें भी झटका लगा, इसलिए उन्होंने तुरंत एटलस साइकिल के सीनियर लेवल पर बात की है। उन्हें बताया गया कि फैक्टरी को बंद नहीं किया गया है, ले ऑफ किया गया है।
एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) में भी कंपनी का मामला चल रहा है, इसमें 18 जून को सुनवाई है। कंपनी की तरफ से एनसीएलटी को सोनीपत में पड़ी 25 एकड़ जमीन बेचने की परमिशन देने के लिए कहा गया है। इससे लगभग 150 करोड़ कंपनी को मिल सकता है। इस समय कंपनी की देनदारी 100 करोड़ से भी कम है।
जमीन बेचने के बाद कंपनी के पास पैसा सरप्लस हो जाएगा, फैक्टरी को दोबारा शुरू करेंगे। चावला के अनुसार वह लुधियाना के कारोबारियों का पैसा निकलवाने के लिए पूरा प्रयास कर रहे है। क्योंकि कोरोना संक्रमण के कारण पहले से साइकिल कारोबार ठंडा चल रहा है। अगर समय रहते कंपनी ने पैसा नहीं दिया तो लुधियाना के कारोबारियों पर संकट के बादल छा सकते है।
घरेलू विवाद है एक कारण
एटलस कंपनी उत्पादन बंद के पीछे पैसा नहीं होने का कारण बता रही है। वही साइकिल निर्माण से जुड़े दिग्गज इसके पीछे दो कारण मान रहे हैं। पहला कारण कंपनी का घरेलू विवाद और दूसरा इनोवेशन की तरफ ध्यान न देना।