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फोन पर बताया कि प्रमोशन होने वाला है, दो दिन बाद पहुंचा शव

Wed, 26 Apr 2017 10:48 AM IST
रमेश शुक्ला ‘सफर’/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
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सीआरपीएफ इंस्पेक्टर रघुबीर सिंह - फोटो : File Photo
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छत्तीसगढ़ के सुकमा जिला स्थित बुरकापाल में नक्सली हमले में शहीद हुए अमृतसर के सठियाला गांव निवासी सीआरपीएफ इंस्पेक्टर रघुबीर सिंह के दोनों बच्चे (बेटा त्रिलोचन व बेटी सिमरन) नक्सलियों के खिलाफ हथियार उठाने को तैयार हैं। बेटे की उम्र 22 वर्ष है तो बेटी अभी 17 वर्ष की है। पहले रघुबीर सिंह पोस्टिंग के दौरान परिवार को साथ रखते थे। पिछले दो साल से छत्तीसगढ़ में पोस्टिंग हुई तो बच्चों की पढ़ाई की खातिर पत्नी बलजीत कौर का चंडीगढ़ में रहने का प्रबंध कर दिया था। बेटा बीटेक कर रहा है और बेटी ग्यारहवीं में है।
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बलजीत कौर (40) चंडीगढ़ में रहते हुए हर रोज पति से फोन पर बात करती थी। उन्होंने रोते हुए बताया कि दो दिन पहले ही उसकी बात फोन पर हुई तो रघुबीर ने कहा था कि प्रमोशन होने वाला है। मैं इंस्पेक्टर से डीएसपी बनने वाला हूं। प्रमोशन मिलते ही छुट्टी लेकर घर आऊंगा। उसके बाद रघुबीर से बात नहीं हुई। उन्हें क्या पता कि दो दिन बाद वे नहीं, उनका शव पहुंचेगा। 

अखबार में खबर पढ़कर शहादत का पता चला :
शहीद के बड़े भाई गुरमुख सिंह कहते हैं कि हमें रघु की शहादत के बारे में जानकारी मंगलवार सुबह अखबारों से मिली। हमारे पास कोई फोन नहीं आया। सीआरपीएफ के पास रघुबीर सिंह की पत्नी बलजीत कौर का जो नंबर 8975848545 था। यह नंबर गलत था। इस नंबर को चलाने वाले सज्जन कहते हैं कि सुबह से सैकड़ों फोन आ गए। हमें तो पता ही नहीं है कि रघुबीर कौन है।
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शहीद के गांव में नहीं जला चूल्हा :

शहीद रघुबीर सिंह का परिवार - फोटो : अमर उजाला
मंगलवार सुबह शहीद रघुबीर सिंह का तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को छत्तीसगढ़ से दिल्ली और दिल्ली से पठानकोट सेना के हेलीकाप्टर में लाया गया। पठानकोट से रघुबीर सिंह का शव कुछ देर के लिए उनके ससुराल (बटाला के पास गांव उधनवाल) ले जाया गया। वहां उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इलाके के विधायक संतोख सिंह भलाईपुर समेत जिला प्रशासनिक अधिकारी शहीद के घर पहुंचे।

वहीं गांव सठियाला में करीब 85 घर हैं। रघुबीर सिंह की शहादत के बाद किसी घर में चूल्हा नहीं जला। गांव के स्कूल में छुट्टी कर दी गई वहीं सारा गांव शहीद को नमन करने उसके पैतृक घर के बाहर जमा रहा।

 
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