रविंदर सिंह बस्सी ने शिकायत में यह भी कहा कि बाबा रामदेव ने माना है कि उन्होंने एलोपैथी और डॉक्टरों के खिलाफ विवादित बयान दिया। हालांकि बाद में अपने इस बयान के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय से माफी मांगी थी। साथ ही रामदेव ने स्वास्थ्य मंत्रालय को माफीनामा भी भेजा था। शिकायत में कहा गया कि इस दौरान सरकार की तरफ से बार-बार ये आदेश जारी हुआ है, कि अफवाह फैलाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में बाबा रामदेव ने एलोपैथी और डॉक्टरों के खिलाफ जो भी अफवाह फैलाई, उस पर सरकार को सख्ती बरतकर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
इन धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग
बस्सी ने शिकायत में अदालत से मांग की है कि बाबा रामदेव के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 (डीसी के नियमों के उल्लंघन करना) 269, 270 (जानबूझकर बीमारी फैलाना) 276 (किसी दवा की जगह दूसरी दवा देना) और डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धारा 51, 52, और 54 के तहत केस चलाया जाए।
एक केस पहले ही विचाराधीन
बीते वर्ष योग गुरु बाबा रामदेव ने कोरोनिल नामक दवा बनाई थी और दावा किया था कि यह दवा कोरोना की बीमारी में काफी लाभकारी है, लेकिन बाद में इस दावे से इनकार कर दिया गया था और इसे सिर्फ इम्युनिटी बूस्टर दवा बताया गया था। बाबा रामेदव के खिलाफ चंडीगढ़ में ही एक एडवोकेट नवजीत बराड़ ने भी केस फाइल किया था। यह केस भी अभी कोर्ट में विचाराधीन बताया जा रहा है। दूसरी शिकायत आने से बाबा रामदेव की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।