बुड्ढा दरिया को प्रदूषण मुक्त रखने के प्रति लापरवाह रवैये को देखकर पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड (पीपीसीबी) ने मेयर और कमिश्नर समेत छह अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करवा दिया। बाद में लुधियाना नगर निगम के इन अफसरों ने अदालत से जमानत ले ली।
बुड्ढा दरिया को प्रदूषण मुक्त करने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल गंभीरता से नजर रखे हुए है, क्योंकि बुड्ढा दरिया का दूषित पानी आगे चलकर सीधे सतलुज दरिया में गिरता है। यह पानी राजस्थान तक जाता है। निगम द्वारा सतलुज दरिया को दूषित करने पर कई बार फटकार लगाई जा चुकी है।
इसलिए निगम ने दरिया में फैल रहे प्रदूषण को खत्म करने के लिए एनजीटी में एक मास्टर प्लान पेश किया था। इसमें निगम ने 2021 तक बुड्ढा दरिया को दूषित मुक्त करने की बात कही है। मास्टर के अनुसार गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एनजीटी में एक कमेटी का गठन किया था, जिसकी जिम्मेदारी थी कि वह चल रहे काम पर रिपोर्ट पेश करे।
निगम के लापरवाह रवैये को देखते कई बार पीपीसीबी अधिकारियों ने काम में तेजी लाने के लिए कहा लेकिन अधिकारी इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे थे।
इससे नाराज पीपीसीबी ने मेयर बलकार संधू, निगम कमिश्नर कंवलप्रीत कौर बराड़, एडिशनल कमिश्नर संयम अग्रवाल, एसई रविंदर गर्ग, एसई रजिंदर सिंह और कार्यकारी एक्सईएन रणवीर सिंह के खिलाफ बुधवार को क्रिमिनल केस दर्ज करवा दिया। इस संबंध में अदालती समन सभी अधिकारियों को मिले तो निगम में हड़कंप मच गया। वीरवार को मेयर सहित सभी अधिकारी चीफ जूडीशियल मजिस्ट्रेट परमजीत सिंह की अदालत में जमानत आवेदन लेकर हाजिर हुए। इसके बाद अदालत ने सभी की जमानत दे दी।
दिसंबर 2020 की है डेड लाइन
सीवरेज के पानी को साफ करने के लिए निगम की तरफ से लगाए गए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) सही काम नहीं कर रहे हैं। जमालपुर और बलोके स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट अंडर कैपेसिटी होने के कारण सीधे पानी बुड्ढा दरिया में डाल रहे हैं। जांच कमेटियों ने इन दोनों प्लांट के कुछ समय पहले नमूने लिए थे, जो फेल निकले। दूसरी तरफ एनजीटी ने निगम को दिसंबर 2020 तक सभी एसटीपी को अपग्रेड करने के लिए कहा है, ताकि वह मानकों के अनुसार काम करे। अभी तक निगम की तरफ से एसटीपी अपग्रेड करने की टेंडर प्रक्रिया को पूरा नहीं किया गया है।