सेवा, सुरक्षा व सहयोग का नारा लगाने वाली पुलिस अब सरेआम गुंडागर्दी पर उतारू हो गई है। आए दिन पुलिस द्वारा किए गए हाथापाई के मामले सामने आने लगे हैं। जीरकपुर पुलिस की ऐसी ही एक करतूत को देखकर लोगों में काफी रोष है। लोगों का कहना है कि प्रदेश सरकार ने पुलिस को गुंडागर्दी का लाइसेंस दे दिया है।
अभी हाल ही 26 अक्तूबर की रात को जीरकपुर स्थित होटल रॉयल सिटी में जीरकपुर थाने में तैनात एक एएसआई और दो हेड कांस्टेबलों ने होटल के कमरे से बाहर निकालकर दो लोगों की बेरमी से पिटाई कर दी। जब दोनों व्यक्तियों ने कारण पूछा तो पुलिस ने अपनी प्राइवेट गाड़ी में बैठाकर थाने ले गई और जबरन आपसी समझौता करा दिया। इसके बाद पीड़ित दोनों व्यक्तियों ने सीसीटीवी फुटेज के साथ मामले की शिकायत पुलिस के आला अधिकारियों को दी। मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने पिटाई करने वाले एएसआई को लाइन हाजिर कर दिया है।
वहीं दोनों हेड कांस्टेबलों की इनक्वायरी मार्क कर दी गई है। दरअसल चंडीगढ़ बैरियर स्थित जीरकपुर के होटल रॉयल सिटी में 26 अक्तूबर की रात गुरविंदर सिंह और राजकुमार यादव अपने दोस्त से रात करीब 11 बजे मिलने गए थे। तभी रात करीब 11.15 मिनट पर वहां तीन पुलिस कर्मी एएसआई हरजिंदर सिंह, हेड कांस्टेबल ओंकार सिंह व बिरेंदर सिंह पहुंचे। गुरविंदर सिंह ने बताया कि अभी वह बात कर रही रहे थे, तभी उनके कमरे के पास पुलिस पहुंच गई। इतने में हेड कांस्टेबल ओंकार सिंह ने एएसआई हरजिंदर सिंह को बताया कि इनमें गुरविंदर सिंह ने एक बार उनकी वीडियो बनाई थी।
फिर क्या था, एएसआई का गुरविंदर सिंह पर गुस्सा फूट गया। बीच बचाव में सामने आए राजकुमार यादव को हेड कांस्टेबल ने दो तमाचा लगाकर किनारे पकड़ कर ले गया और उसके बाद गुरविंदर सिंह की तीनों पुलिस कर्मियों ने जमकर पिटाई की। जब दोनों ने कारण पूछा तो एएसआई ने कहा इन्हें थाने लेकर चलो, ये ऐसे नहीं मानेंगे। इसके बाद दोनों को पुलिस होटल के बाहर लेकर गई। इतने में गुरविंदर सिंह ने एएसआई से कहा कि पुलिस कर्मियों और हमारा मेडिकल करवाओ।
इसके बाद तीन पुलिस के मुलाजिम भड़क गए और दोनों को अपनी निजी कार में बैठाया और दोनों की गाड़ी में जमकर पिटाई की। थाने ले जाने के बाद भी गुरविंदर सिंह और राजकुमार यादव अपना मेडिकल कराने की बात तीन पुलिस के मुुलाजिमों से करते रहे। इसके बाद तीनों ने थाने से मेडिकल कराने के बहाने दोनों को बाहर लेकर गए और अपनी निजी गाड़ी में थाने के बाहर घुमाते रहे, लेकिन इस बीच मेडिकल नहीं करवाया और दोनों को लेकर थाने पहुंच गए।
गुरविंदर ने बताया कि एक पुलिस मुलाजिम ने थाने में अपने मनमर्जी के हिसाब से राजीनामा पंजाबी में तैयार किया और दोनों को पंजाबी नहीं आती। इसके बाद एएसआई ने जबरन राजीनामा पर हस्ताक्षर करवा लिए। लेकिन तीनों पुलिस कर्मियों द्वारा की गई मारपीट की सारी करतूतें सीसीटीवी फुटेज कैद हो गई थी। अगर ये मामला सीसीटीवी फुटेज में कैद नहीं होती, तो यहां पुलिस मामले को पहले दबा जाती।