कैसे करें बचाव
फायर आफिसर तरसेम सिंह का कहना है कि घर में अंगीठी जलाते समय वेंटिलेशन (हवा) का ध्यान रखें। कमरे की खिड़की को खुला रखें। जिस से दम ना घुट सके और सोते समय अंगीठी को कमरे से बाहर रख दें।
बंद कमरे में अंगीठी, हीटर न जलाएं
सर्दी से बचने के लिए बंद कमरे में अंगीठी और रूम हीटर का प्रयोग जानलेवा हो सकता है। अगर आप ऐसा करते हैं तो अलर्ट रहें। अंगीठी में इस्तेमाल होने वाले कोयले या लकड़ी के जलने से कॉर्बन-मोनोऑक्साइड के अलावा कई जहरीली गैसें निकलती हैं, जो जानलेवा साबित होती हैं। अंगीठी ही नहीं, इस तरह का खतरा रूम हीटर से भी हो सकता है। इसलिए सावधान और सुरक्षित रहें।
कम हो जाता है ऑक्सीजन स्तर
सेक्टर-6 नागरिक अस्पताल मेडिसिन डिपार्टमेंट के एसओडी डॉ. अश्वनी भटनागर ने बताया कि बंद कमरे में हीटर, ब्लोअर या अंगीठी जलाने से गर्मी बढ़ने से धीरे-धीरे कमरे में ऑक्सीजन खत्म हो जाती है। कार्बन मोनोऑक्साइड अत्यधिक बढ़ जाती है। यह गैस सांस के माध्यम से फेफड़ों तक पहुंच कर खून में मिल जाती है। इससे खून में हीमोग्लोबिन का स्तर घट जाता है, जिससे व्यक्ति की मौत हो जाती है। उन्होंने बताया कि इस गैस का पता भी नहीं चलता, व्यक्ति सूंघता रहता है और उसकी मौत हो जाती है।
ये सावधानी बरतें
- जिन कमरों में हवा निकलने का रास्ता न हो, वहां अंगीठी जलाकर बिल्कुल नहीं सोना चाहिए।
- लोग कमरा इसलिए बंद कर लेते हैं कि अंगीठी की गर्मी बनी रहे लेकिन यह भूल जाते हैं कि कमरे में धुआं भी भरेगा।
- सबसे जरूरी है वेंटिलेशन, जहां हवादार नहीं है वहां खतरा है।
- बहुत देर तक ब्लोअर, हीटर या फिर आग के सामने बैठने से ड्राइनेस की समस्या हो सकती है।
- अगर आप हीटर का प्रयोग करते हैं तो कमरे में एक बाल्टी पानी रखें, जिससे कुछ हद तक नमी बनी रहे।
- बहुत देर तक हीटर-ब्लोअर और आग के संपर्क में रहने से त्वचा की कुदरती नमी प्रभावित होती है।
- गर्म कमरे से बाहर जाने पर भी बीमार पड़ सकते हैं।
शुरुआती लक्षण
अगर आप किसी ऐसी जगह हैं जहां कार्बन मोनोऑक्साइड का प्रतिशत अधिक है तो सिर दर्द, चक्कर आना, उल्टी महसूस होना जैसे लक्षण नजर आएंगे। सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन की भी शिकायत हो सकती है।