फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फाइनेंसर के चंगुल में ऐसा फंसा, दे दी जान

Wed, 01 Apr 2015 01:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार(हरियाणा)
विज्ञापन
विज्ञापन
कृषि विश्वविद्यालय में कार्यरत कर्मचारी एक फाइनेंसर के चंगुल में ऐसा फंसा की उसे अपनी जान गंवानी पड़ी। मामला हरियाणा के हिसार का है।
विज्ञापन


चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) में एक कर्मचारी फैकल्टी हाउस के पीछे पेड़ पर फंदे पर लटकता मिला है। मृतक की शिनाख्त रजिस्ट्रार ऑफिस में कार्यरत दफ्तरी 57 वर्षीय हरफूल के रूप में हुई है। मामला सुबह साढ़े पांच बजे का है उसे फंदे पर लटकते हुए सिक्योरिटी गार्ड ने देखा। मामले की सूचना उसने तुरंत पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में ले लिया।

मृतक की जेब से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उसने एचएयू के ही एक रिटायर्ड कर्मचारी एवं फाइनेंसर सुरेश लांग्यान से तंग आकर खुद की जीवनलीला समाप्त करने की बात लिखी है।
विज्ञापन


पुलिस को दिए बयान में हरफूल के बेटे अजय ने पुलिस को बताया है कि वे प्रोफेसर कॉलोनी में रहते हैं। सुरेश लांग्यान से उनके पिता ने कर्ज ले रखा था। सुरेश ब्याज पर ब्याज लगा रहा था। करीब 30 लाख रुपये से अधिक राशि वे अपने रिश्तेदारों व दोस्तों से लेकर उसे दे चुके  थे, जबकि मूल राशि करीब 10 लाख रुपये के आसपास थी।

उन्होंने कहा कि सुरेश ने रुपये न देने पर 30 मार्च को मकान खाली करवाने की धमकी दी थी। फाइनेंसर की धमकी और बार बार परेशान करने के चलते पिता ने फांसी लगाकर जान दे दी। एचएयू चौकी पुलिस ने मृतक अजय के बयान पर सुरेश के खिलाफ धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। चौकी इंचार्ज वीरेंद्र ने बताया है कि देर शाम पुलिस ने सुरेश को उसके सेक्टर 16 स्थित मकान से गिरफ्तार भी कर लिया।

ये लिखा सुसाइड नोट में
हरफूल ने लिखा है कि वह सुरेश लांग्यान से ब्याज पर रुपये लेकर मकान बनाकर बेचता था। उसने कई बार रुपये लिए और मकान बेचते ही वापस लौटा दिए। सात साल पहले सुरेश से करीब 10 लाख रुपये लिए थे। यह राशि उसने एक मकान पर लगा दी।
विज्ञापन


मकान सात साल से बिका नहीं। अब सुरेश बार-बार रुपये मांग रहा है। सुरेश को मैंने रिश्तेदारों और दोस्तों से लेकर 10 लाख मूल का 30 लाख ब्याज दे चुका हूं। इसके बाद भी मकान खाली करवाने की धमकी दे रहा है। इससे तो अच्छा है कि मैं अपनी जीवनलीला ही समाप्त कर लूं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें