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कर्ज के 'फंदे' में किसान, 2 ने सल्फास खाकर दी जान, सरकार बेपरवाह!

Mon, 10 Oct 2016 09:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना/मानसा
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मृतक बलजीत सिंह की फाइल फोटो
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पंजाब में किसानों द्वारा खुदकुशियां करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। कर्ज के 'फंदे' से झूल रहे दो और किसानों ने अपनी जान दे दी। पहला मामला मानसा का है जहां ख्याला कला के एक किसान ने रविवार रात को कोई जहरीला पदार्थ निगल कर खुदकुशी कर ली। मृतक के बड़े भाई दरबारा सिंह ने भी करीब तीन साल पहले कर्ज से आहत होकर अपनी जान दे दी थी।
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मृतक किसान चार भाइयों के साथ संयुक्त परिवार में रहता था।  उस पर बैंक, सोसाइटी और आढ़ती का करीब 12 लाख का कर्ज था। गांव ख्याला कला का किसान बलजीत सिंह (30) ढाई एकड़ जमीन का मालिक था। हर साल खेती में पड़े घाटे की वजह से बलजीत सिंह दिमागी तौर पर परेशान रहता था। बलजीत के पिता तेजा सिंह और माता हरपाल कौर ने बताया कि परिवार पर कर्ज बढ़ने की वजह से बलजीत सिंह अपने भाई दरबारा सिंह जैसे ही परेशान रहने लगा था।

इस वजह से उसने घर में ही कोई जहरीला पदार्थ निगल लिया। मृतक का अंतिम संस्कार कर दिया गया। भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा के प्रांतीय सचिव गोरा सिंह भैणीवाघा, जरनैल सिंह खयाला, गुरदीप सिंह ने सरकार से मांग की है कि इस परिवार को कर्ज से मुक्त किया जाए और पांच लाख का मुआवजा दिया जाए।
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लगातार खेती में घाटा होने के कारण चल रहें थे परेशान

किसान आत्महत्या - फोटो : Demo Pic
दूसरा मामला लुधियाना के एतिआणा गांव का है, जहां 36 वर्षीय किसान गुरजीत सिंह ने सल्फास की गोलियां निगलकर जान दी। सूचना मिलने के बाद थाना सुधार की पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने गुरजीत की पत्नी पवनदीप कौर के बयान पर मामला दर्ज कर लिया है। एतिआणा गांव के सरपंच गुरमीत सिंह गिल ने सरकार से मृतक के परिवार को मुआवजा देने की मांग की है। 

सरपंच गुरमीत सिंह ने कहा कि गुरजीत सिंह के पास ढाई एकड़ जमीन थी। उसने साढ़े पांच एकड़ जमीन ठेके पर ले रखी थी और आठ एकड़ पर खेती करता था। पिछले कई साल से खेती में घाटा होने के कारण इस पर कर्ज बढ़ता जा रहा था। गुरजीत पर बैंकों का करीब 16-17 लाख रुपये कर्ज चढ़ चुका था। बैंक अधिकारी उस पर कर्ज लौटाने का दबाव बनाए हुए थे, जिस कारण वह काफी परेशान रहता था। रविवार शाम उसने गेहूं की बोरियों में पड़ी सल्फास की गोलियां निकालकर खा ली थी।

उसकी तबीयत खराब हुई तो परिवार वाले उसे सुधार बाजार स्थित एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां से उसे डीएमसी अस्पताल रेफर कर दिया। वहां उसकी मौत हो गई। गुरजीत के पिता दिलबाग सिंह गांव के पूर्व सरपंच थे, जिनकी मौत काफी पहले हो चुकी। परिवार में गुरजीत इकलौता कमाने वाला था। घर में उसकी मां, पत्नी और 12 साल का बेटा हैं।
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