श्रावण की शिवरात्रि पर हरिद्वार से कांवड़ लेकर लौट रहे बिचपड़ी के 17 कांवड़िये डीजे पर बज रहे भोले के भजनों पर झूमते चल रहे थे। वे अपने गांव से करीब 400 मीटर ही दूर थे और बिचपड़ी मोड़ के समीप पहुंचे थे कि पीछे से एक ट्रक उनके लिए काल बनकर आया।
ट्रक चालक ने नींद की झपकी आने के कारण कुछ कांवड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया। सोमवार-मंगलवार की रात करीब डेढ़ बजे हुए हादसे में तीन कांवड़ियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सात अन्य घायल हो गए, जिनमें दो की हालत गंभीर बनी हुई है।
बिचपड़ी गांव के 15 युवक डाक कांवड़ लेने के लिए 25 जुलाई को हरिद्वार के लिए रवाना हुए थे। उसके बाद दो युवक और 27 जुलाई को घर से रवाना हो गए और हरिद्वार में अपने साथियों की टोली में शामिल हो गए। गांव के इन युवाओं में सभी दोस्त थे और कुछ आपस में चाचा-ताऊ के परिवार में भी थे।
युवाओं की यह टोली डाक कांवड़ लेकर जा रही थी, जिसमें कुछ गाड़ी में सवार थे और कुछ बाइकों पर साथ चल रहे थे, जबकि दो युवा कांवड़ पकड़े हुए थे। यह टोली अपने गांव से मात्र 400 मीटर ही दूर थी कि ट्रक उनके लिए मौत बनकर आया। डीजे की तेज आवाज में कांवड़ियों को जल्दी से कुछ पता नहीं चल सका और जब पता चला तब तक ट्रक चालक मौके से फरार हो चुका था।
ये कांवड़िये हादसे का शिकार
हादसे में 27 वर्षीय राजसिंह, 18 वर्षीय राहुल और 23 वर्षीय रोहताश की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सोनू पुत्र विरेंद्र, विकास, अनिल, संदीप, प्रदीप, सुरेंद्र और सोनू पुत्र प्रकाश घायल हो गए।
उन्हें आनन-फानन में बरवाला और हिसार के अस्पतालों में पहुंचाया गया। सोनू पुत्र विरेंद्र व सोनू पुत्र प्रकाश की हालत गंभीर बनी हुई है, जबकि बाकी पांच को मंगलवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
गांव में डीजे हुआ बंद, घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े ग्रामीण
जहां हादसा हुआ, वहां से गांव मात्र 400 मीटर दूर रह गया था। गांव के युवाओं के पहुंचने की बाट जोह रहे ग्रामीण गांव के शिव मंदिर में डीजे लगाकर शिव भजनों पर झूम रहे थे। जैसे ही उन्हें हादसे की जानकारी मिली तो पूरा गांव घटनास्थल की ओर दौड़ पड़ा।