2020 में पठानकोट में तैनात था आरोपी
सैन्य सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2019 में पीड़ित मनोज की आरोपी के साथी बिट्टू से मुलाकात अयोध्या में सैन्य भर्ती के दौरान हुई थी। 2020 में राहुल ने मनोज को नौकरी लगाने की बात कही और वर्दी पहनकर वीडियो कॉल की। मनोज और उसके भाई भीमसेन से उसने आठ-आठ लाख रुपये ठगे थे।
आरोपियों ने दोनों को सेना की वर्दी, असलहा और फर्जी आईकार्ड उपलब्ध कराया। फर्जी नियुक्ति कर पठानकोट में 2020 में ट्रेनिंग दी। उस समय आरोपी राहुल की पोस्टिंग पठानकोट में थी। हर महीने उनके खाते में 12 हजार रुपये खुद से वेतन डालता रहा। आर्मी के एक जवान ने उसके पहचान पत्र को फर्जी बताया। इसके बाद आर्मी इंटेलिजेंस से शिकायत की गई। पुलिस और आर्मी इंटेलिजेंस ने जांच के बाद पीड़ित मनोज की शिकायत पर थाने में मुकदमा दर्ज करवाया।
छह महीने की छुट्टी में युवाओं को ठगने का करता था काम
सैन्य सूत्र बताते हैं कि टेरिटोरियल आर्मी में छह माह नौकरी और छह महीने बिना वेतन घर में रहने का प्रावधान है। इसके चलते राहुल छह महीने सेना के अफसरों की वर्दी पहन साथी बिट्टू के साथ बेरोजगार युवकों को ढूंढता था। जो लोग सेना में भर्ती होने के इच्छुक होते थे, उनके नौकरी लगाने के नाम पर ठगी कर लेता था। इस दौरान आरोपी कभी आर्मी के कैप्टन तो कभी मेजर की वर्दी पहनकर रौब जमाता था। आरोपी राहुल का नेटवर्क कहां तक फैला है, इसकी जांच में पुलिस और सेना की खूफिया एजेंसियां जुटी हैं। अभी तक पूछताछ में सामने आया है कि राहुल की पोस्टिंग अनंतनाग (जम्मू-कश्मीर) में चल रही है।