अपराध करने वाले नाबालिगों को सुधरने का मौका देने के लिए देश के कानून में उनके प्रति नरमी बरती गई है। किशोर न्याय अधिनियम (जुवेनाइल जस्टिस एक्ट) के तहत बच्चों और नाबालिगों के खिलाफ मामूली या कम सजाएं होती हैं। इसका फायदा अपराधी उठा रहे हैं और अपराध के लिए बड़ी संख्या में बच्चों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
चंडीगढ़ में किशोर अब सिर्फ जेबकतरी या चोरी तक सीमित नहीं रह गए हैं। किशोर हत्या का प्रयास, हथियारों से हमले, दुष्कर्म, चोरी, लूट और झपटमारी जैसी बड़ी वारदातों में गिरफ्तार हुए हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 2020 से लेकर अप्रैल 2025 तक कुल 64 किशोरों को हत्या के प्रयास के मामलों में पकड़ा गया। सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा 2024 का है, जब अकेले 19 किशोरों को इस अपराध में पकड़ा गया, जो पांच वर्षों में सबसे अधिक है। वहीं, 2025 के शुरुआती चार महीनों में ही 13 किशोरों को इसी अपराध में हिरासत में लिया जा चुका है।
जहां पहले किशोरों को चोरी, स्नैचिंग या दंगा फैलाने जैसे छोटे अपराधों में पकड़ा जाता था, अब हत्या के प्रयास जैसे अपराध तेजी से बढ़े हैं। आंकड़ों के अनुसार, किशोरों द्वारा किए गए अपराधों में सबसे अधिक चोरी के 86, स्नैचिंग के 64 और मारपीट और झगड़े के मामलों में 60 किशोर गिरफ्तार हुए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इन अपराधों में चाकू और लोहे की रॉड जैसे हथियारों का इस्तेमाल बढ़ा है और अधिकतर घटनाएं गैंग रंजिश या बदले की भावना से प्रेरित होती हैं।
कई किशोर बाल सुधार गृह में आपस में संपर्क बनाते हैं और रिहा होने के बाद फिर से संगठित होकर अपराध करते हैं। बेल मिलना आसान है और अधिकतम सजा कम होती है, चाहे अपराध कितना भी गंभीर क्यों न हो। यही वजह है कि अपराधी भी किशोरों का इस्तेमाल अपराधों के लिए करते हैं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि किशोर न्याय प्रणाली सख्त नहीं है।
अपराध 2020 2021 2022 2023 2024 2025 (31 अप्रैल तक) कुल
हत्या 4 4 2 17 4 5 36