लुधियाना में स्कूल टीचर ने बच्ची को टॉर्चर किया
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अभिभावकों ने फीस जमा नहीं कराई तो टीचर ने बच्ची को इस तरह से टॉर्चर किया कि उसकी तबीयत खराब हो गई। दरअसल, टीचर ने बच्ची को सुबह आठ बजे से लेकर दोपहर डेढ़ बजे तक उसे क्लास रूम में ही बैठा कर रखा। इस दौरान बच्ची को न तो पानी दिया गया और न ही वाशरूम जाने दिया गया। नतीजा यह हुआ कि बच्ची की तबीयत खराब हो गई। हालत बिगड़ते देखकर स्कूल प्रशासन ने अभिभावकों को फोन किया तो पड़ोसी बच्ची को लेने आया, जिसे देखकर बच्ची रोने लगी और उसने घर आकर मां को सारी बात बताई।
पीड़ित बच्ची का नाम लुधियाना निवासी विश्वकर्मा चौक राम नगर निवासी मंदीप सिंह की बेटी कमलप्रीत बताया जा रहा है। अब बच्ची के पिता ने शिमलापुरी स्थित गुरु नानक माडल सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल विश्वकर्मा कालोनी में अध्यापिका की ओर से टार्चर किए जाने का आरोप लगाया है। इस संबंध में सर्किट हाउस में विभिन्न संस्थाओं के साथ प्रेसवार्ता में अभिभावक ने यह आरोप लगाए।
मनदीप सिंह ने बताया कि शिमलापुरी स्थित निजी स्कूल में उनकी बेटी कमलप्रीत पिछले चार वर्ष से पढ़ रही है। निजी स्कूलों की ओर से अधिक पैसे मांगने की वजह से पेरेंटस के चल रहे रोष प्रदर्शन के चलते फीस जमा नहीं कराई थी। स्कूल की ओर से लगातार फीस जमा करवाने के लिए कहा जा रहा है। मंगलवार को बेटी को स्कूल भेजा गया। फीस जमा न करवाने के वजह से कमलप्रीत को टॉर्चर किया गया। मां रीना रानी ने बताया कि जब वह बुधवार को स्कूल गई तो वाइस प्रिंसिपल ने सभी बातों को खारिज कर दिया।
प्रिंसिपल गुरबचन सिंह ग्रेवाल ने भी उनसे गलत व्यवहार किया। अध्यापकों से गलत व्यवहार करने पर माफी का एक लैटर लिखवा कर उसके हस्ताक्षर करवा कर घर भेज दिया गया। रीना रानी ने बताया कि इस स्कूल की लुधियाना में सात ब्रांचे है। स्कूल की ओर से पांच हजार रुपए एडमीशन फीस, दो हजार किताबों के, एक हजार रुपए वर्दी के और आठ सौ रुपये स्कूल फीस मांगी जा रही है। सीपीआई, मिशन समानता, बेलन ब्रिगेड आदि संस्थाओं ने सरकार से स्कूल पर कार्रवाई करने की मांग की।
स्कूल प्रिंसिपल गुरबचन सिंह ने सभी आरोपो को खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि जब यह घटना हुई तब वह स्कूल में नहीं थे। स्कूल आने पर जानकारी ली गई। जिसमें इस तरह का कुछ भी सामना नहीं आया कि बच्चे को टार्चर किया गया हो। कमलप्रीत के पेरेंट्स स्कूल आए थे। उनके साथ सारी बात कर उनकी संतुष्टि कर घर भेजा गया। हो सकता है कि वह किसी की बातों में आकर इस तरह कह रहे हों।