मोहाली पुलिस ने ऐसे नटवरलाल को गिरफ्तार किया जो लोगों को रेलवे में नौकरी दिलवाने का सपना दिखाकर ठगता था। राजपुरा से गिरफ्तार आरोपी की पहचान महिंदर सिंह निवासी हाउस नंबर तीन जग्गी कॉलोनी राजपुरा के रूप में हुई है।
आरोपी को अदालत में पेश किया गया। जानकारी के मुताबिक, पुलिस कई महीने से आरोपी की तलाश में थी। आरोपी के बारे में सूचना मिलते ही थाना फेज-8 की पुलिस ने पूरे इलाके में जाल बिछा दिया था। जैसे ही आरोपी देर रात अपने घर पहुंचा।
पुलिस ने उसे दबोच लिया। वहीं, आरोपी के पकड़े जाने की जैसे ही खबर लोगों तक पहुंची तो वह फेज-8 थाने में पहुंचने लगे। यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहा है। वहीं, पुलिस भी मान रही है कि आरोपी काफी शातिर है। वहीं, पुलिस आरोपी के अन्य लिंक भी तलाश रही है।
किसी को बेटी तो किसी को भाई बनाकर ठगा: पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी काफी शातिर था। वह पूरी प्लानिंग से घर से कार में निकलता था। उसके साथ एक महिला भी रहती थी। वहीं, रेलवे अधिकारियों की ड्रेस में रहता था। जहां भी उसे लगता था कि युवक उसकी बातों में आ सकते हैं। वह उन्हें अपना शिकार बना लेता था। इस दौरान वह हमेशा ही रिश्ता बनाकर बात करता था। किसी को बेटी तो किसी को भाई बनाकर उसने अपना शिकार बनाया है।
विकलांग से लेकर पुजारी तक को ठग चुका है
गिरफ्तार
- फोटो : arrest
आरोपी का मेन उद्देश्य पैसा कमाना होता था। वह विकलांग से लेकर पुजारी तक को ठग चुका है। आरोपी ग्रामीण एरिया के लोगों को निशाना बनाता था। इनमें पंजाब के होशियारपुर, संगरूर, लुधियाना, जालंधर, नकोदर, पटियाला व आनंदपुर शामिल हैं।
नौकरी पाने को लोगों ने लिया लोन
आरोपी लोगों को ऐसे तरीके से रेलवे की नौकरी के सपने दिखाता था कि लोग हर हालत में नौकरी हासिल करना चाहते थे। ऐसे में लोग लोन लेकर तक उसे रकम देते थे। फेज-8 थाने में पहुंचे एक व्यक्ति ने बताया कि उसने एक व्यक्ति के पास 30 हजार में अपनी बाइक गिरवी रखी हुई। वहीं, आनंदपुर साहिब की महिला कर्मजीत कौर ने बताया कि उसने तीन हजार के लिए अपना सोना गिरवी रखा हुआ है।
ऐसे करता था ठगी
आरोपी सरकारी पेपरों का पूरा ध्यान रखता था। जिस दिन पेपर होता था। उस दिन वह शिकार को पेपर देने के लिए बुलाता था। साथ ही उन्हें दो फोटो व आइडी प्रूफ साथ लेकर आने को कहता था। जैसे ही वह सेंटर के बाहर पहुंचता था।
इसके बाद उसका मोबाइल बंद करवा लेता था। साथ ही मोबाइल की बैटरी व सिम जमा करवाने के बहाने हासिल कर लेता था। इसके बाद वह दूसरे रास्ते से निकल जाता था। वहीं, ठगा गया व्यक्ति लाइनों में खड़े रहकर धक्के खाता रहता था।