किसान का शव लेकर सरकार के खिलाफ रोष मार्च
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जगरांव के गांव गालिब कलां में कर्ज से परेशान एक किसान ने मौत को गले लगा लिया। किसान ने मरने से पहले सुसाइड नोट लिख कर कर्ज के हाथों हारी जिंदगी को बयान किया।
गालिब कलां निवासी किसान बलजिंदर सिंह अपनी दो एकड़ जमीन में कृषि कर रहा था।
इस जमीन पर आढ़ती समेत दो बैंकों एवं एक को आपरेटिव सोसाइटी का करीब 13 लाख रुपये का कर्ज था। कर्ज वापस करने में असमर्थ किसान ने बुधवार की सुबह करीब पांच बजे घर में ही कोई जहरीली वस्तु खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मरने से पहले उसने सुसाइड नोट में लिखा कि किस का मरने का जी करता है, कोई भी अपने बच्चों को छोड़ कर नहीं जाना चाहता। परेशानियां यह सब करा देती हैं। किसान ने लिखा कि उसकी मौत का कोई कसूरवार नहीं है।
घटना की जानकारी मिलते ही गालिब कलां पुलिस चौकी के प्रभारी निधान सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया। मृतक के बेटे शमशेर सिंह ने पुलिस को बताया कि उसके पिता ने बैंक से छह लाख रुपये की लिमिट ली थी। डेढ़ लाख रुपये सेंट्रल बैंक से कर्ज, 50 हजार रुपये को आपरेटिव सोसाइटी और आढ़ती को पांच लाख रुपये देने थे। इसी परेशानी में उन्होंने यह कदम उठाया है।
शव के साथ किया रोष मार्च
गांव गालिब कलां में कर्जदार किसान के आत्महत्या करने के बाद किसान जत्थेबंदियां भड़क गईं और किसान का शव लेकर सरकार के खिलाफ रोष मार्च निकाला। किसान की आत्महत्या की खबर सुनते ही किसान जत्थेबंदियों से जुड़े सदस्य सिविल अस्पताल पहुंचना शुरू हो गए। पोस्टमार्टम के बाद जत्थेबंदियों सदस्यों ने शव गाड़ी पर रख लिया और पैदल चल कर रोष मार्च निकाला। इंकलाबी केंद्र पंजाब के कमलजीत खन्ना ने सरकार की किसान विरोधी नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि आज कृषि फायदेमंद सौदा नहीं रहा। किसान पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। इससे किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि किसान का कर्ज माफ किया जाए।