प्रदर्शनकारियों से तंग आकर पुलिस कर्मचारी ने सुसाइड कर लिया है। सुसाइड नोट में भाजपा और इनेलो नेताओं सहित 16 लोग जिम्मेदार ठहराए गए हैं। घटना हरियाणा के फतेहाबाद की है।
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भूना थाने में जहर पीकर आत्महत्या का प्रयास करने वाले एएएसआई एवं थाने के पूर्व मुंशी लालचंद ने मंगलवार सुबह हिसार के प्राइवेट अस्पताल में दम तोड़ दिया। लालचंद के पास से पुलिस को सुसाइड नोट भी मिला। जिसमें एएसआई ने थाने के ही एक पुलिस अधिकारी, थाने में प्रदर्शन करने वाले भाजपा और इनेलो नेताओं सहित 16 लोगों पर आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है।
भूना पुलिस ने मृतक लालचंद के बेटे राजेश की शिकायत पर 16 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज लिया है। जिसके बाद फतेहाबाद के पुलिस प्रशासन से लेकर नेताओं तक में हड़कंप मच गया है।
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जानकारी के अनुसार भूना थाने में तैनात रहे मुंशी एवं एएसआई लालचंद ने सोमवार सुबह जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था। जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और थाने में मौजूद पुलिस कर्मचारी लालचंद को सामान्य अस्पताल फतेहाबाद लेकर पहुंचे जहां पर चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार देने के बाद हिसार रेफर कर दिया।
जहां पर उनका उपचार शुरू हुआ और इस दौरान पुलिस के सामने लालचंद के बेटे राजेश ने सुसाइड नोट पेश किया और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। जिसके बाद पुलिस अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। इलाज के दौरान मंगलवार सुबह लालचंद ने हिसार के प्राइवेट अस्पताल में दम तोड़ दिया। भूना पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर उपरोक्त लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
सुसाइड नोट में लालचंद ने लिखा कि नरेन्द्र उर्फ निका, छिंदा उर्फ सुरेन्द्र, राकेश छोकर, गुरदयाल कंबोज, जोगेन्द्र बंसल, बलविन्द्र कैरो, नरेंद्र सिवाच, बलजीत सोनी, सुशील बिश्नोई, भाजपा नेता सत्यवान चौहान, भाजपा के पूर्व जिला प्रधान एवं इनेलो नेता मोलूराम रुल्हानियां, आशु पुत्र पवन निवासी भूना, रामस्वरूप ढाणी गोपाल, संदीप, विक्रम शर्मा निवासी भूना तथा थाने के ही सिक्योरिटी एजेंट महेन्द्र सिंह उसे बार-बार तंग कर रहे हैं जिस कारण वह सुसाइड कर रहा है।
किया था थाने का घेराव लालचंद ने जिन व्यक्तियों के नाम सुसाइड नोट में लिखे हैं उन्होंने 20 दिन पहले भूना थाने का घेराव किया था और दो दिन तक जाम लगाते हुए थाने के पुलिस कर्मचारियों को बदलने की मांग की थी। जिसके बाद तत्कालीन एसपी पारुल कुश ने काफी फेरबदल किया था और लालचंद को भूना मुंशी के पद से हटाकर पुलिस लाइन भेजा गया था लेकिन अभी तक रिलीव नहीं किया था और इस बीच लालचंद ने जहर पीकर सुसाइड कर लिया।
आत्महत्या ने उठाए बहुत से सवाल लालचंद ने सुसाइड नोट में जिनके नाम लिखे हैं उनमें भाजपा नेता, इनेलो नेता, जिला परिषद के पूर्व प्रधान तथा खुद के कार्यलय के सिक्योरिटी एजेंट का नाम भी शामिल है। अब सवाल यह उठ रहा है कि थाने का घेराव करने वाले ये नेता किस तरह से लालचंद को परेशान कर रहे थे और सिक्योरिटी एजेंट महेन्द्र सिंह की किस बात से लालचंद दुखी था, जिस कारण उसे मौत को चुनना पड़ा।
अब सवाल यह भी उठ रहा है कि सोमवार को जिस समय लालचंद को सामान्य अस्पताल लाया गया, उस समय ये ही अटकलें लगाई जा रही थी कि घरेलू परेशानी के चलते आत्महत्या का प्रयास किया गया है और कुछ देर बाद इस मामले में नया मोड़ आ गया। ये भी बड़ा सवाल है कि ऐसी क्या बात है जो अपने विभाग के कप्तान तक से ये बात छुपाई गई। खैर अब पुलिस जांच के बाद ही इन सवालों का जवाब मिल पाएगा।