इसी घर के आगे छत्रपति को मारी गई थी गोली
बताते हैं कि जिस एंबुलेंस में घायल छत्रपति को लेकर जाना था, उसमें बैठने की हिम्मत छत्रपति के करीबी साथियों की भी नहीं हो रही थी। सभी को डर था कि रास्ते में डेरा अनुयायी हमला कर सकते हैं। इसी बीच वरिष्ठ पत्रकार आरके भारद्वाज एंबुलेंस से रोहतक गए। छत्रपति परिवार ने प्रशासन से रोहतक पीजीआई में रामचंद्र के मजिस्ट्रेट समक्ष बयान दर्ज करने की गुजारिश की, लेकिन प्रशासन ने ऐसा नहीं किया।
रोहतक पीजीआई में दाखिल रहते छत्रपति मिलने आने वाले हर शख्स से बातचीत करते थे। कुछ दिनों बाद उन्हें रोहतक से दिल्ली अपोलो अस्पताल रेफर कर दिया गया। अपोलो में 28 दिन बाद 21 नवंबर 2002 को छत्रपति की मौत हो गई। छत्रपति का शव सिरसा लाया गया तो सम्मान में पूरा शहर उमड़ पड़ा।
शहर के सभी दुकानदारों और व्यापारियों ने अपने संस्थान बंद रखे। छत्रपति की शव यात्रा में पांच हजार से अधिक लोग शामिल हुए। सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार शिवपुरी में किया गया।
छत्रपति के छोटे पुत्र अरिदमन ने दी थी डेरा मुखी के खिलाफ शिकायत
हमला होने के बाद रामचंद्र के छोटे पुत्र अरिदमन ने शहर थाना पुलिस को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाफ शिकायत दी थी। पुलिस ने हमला करने में शामिल रहे तीन डेरा अनुयायियों पर हत्या का केस तो दर्ज कर लिया, लेकिन गुरमीत राम रहीम के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया। पुलिस ने आनन-फानन में चार्जशीट फाइल कर सिरसा कोर्ट में चालान पेश कर दिया।
सिरसा के तत्कालीन अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरएस बागड़ी की कोर्ट में केस का ट्रायल शुरू हो गया। गुरमीत को उसकी करनी की सजा दिलाने के लिए अंशुल ने हाईकोर्ट में सीबीआई जांच के लिए याचिका दायर की। 10 नवंबर 2003 को हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए।