उनका कहना है कि वे बरेली पहुंचे तो उन्हें शव नहीं देखने दिया। जब उन्होंने शव को देखा तो मृतक के शरीर पर चोट के निशान थे। उससे उन्हें शक हुआ कि किसी ने उसकी हत्या कर शव को फंदे पर लटकाया है। उन्होंने वहां की पुलिस से भी इस संबंध में मदद मांगी थी। उनका आरोप है कि वहां की पुलिस ने भी उनकी मदद नहीं की। रात करीब दो बजे झज्जर सामान्य अस्पताल शव लेकर आए थे।
सुबह दोबारा से शव का पोस्टमार्टम करवाने के लिए वे एसडीएम शिखा से मिले। उन्होंने एसडीएम से दोबारा शव का पोस्टमार्टम करवाने की मांग की तो उन्होंने पोस्टमार्टम चिकित्सकों के बोर्ड से करवाने की बात कही। उसके बाद झज्जर शहर पुलिस थाना प्रभारी कुलदीप सिंह टीम के साथ अस्पताल पहुंचे और उन्होंने परिजनों को बताया कि तहसीलदार को बतौर ड्यूटी मजिस्ट्रेट अस्पताल में भेजा जा रहा है। कुछ देर बाद तहसीलदार होशियार सिंह भी अस्पताल में पहुंच गए थे।
प्रशासन से नहीं मिली अनुमति
काफी जद्दोजहद के बाद मृतक के भाइयों से पोस्टमार्टम के लिए साल्हावास के पुलिस थाना प्रभारी बिजेंद्र सिंह और तहसीलदार के साथ उसके परिजन कानूनी सलाह लेने के लिए लघु सचिवालय पहुंचे। यहां से अनुमति न मिलने के बाद पुलिस थाना प्रभारी वापस अस्पताल पहुंचे और दोनों थाना प्रभारियों ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाना उनका काम है।
शव को लेकर आए फौजियों की गाड़ी को रोकने का प्रयास किया तो पुलिस उन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करेगी। उसके बाद पुलिस ने शव को लेकर आई गाड़ी को वहां से निकलवा दिया गया। जबकि उसके भाई और बहनों ने कहा कि हाईकोर्ट में वकील गया है केवल दो घंटे का समय दें। दोबारा से पोस्टमार्टम के आदेश आ जाएंगे। लेकिन पुलिस ने शव को अस्पताल से घर भेज दिया। जहां पर सासरौली पुलिस चौकी प्रभारी सुंदरपाल भी मौके पर पहुंच गए थे।
शाम को आया आदेश, शव का कराया जाए पोस्टमार्टम
बलजीत के शव का पोस्टमार्टम दोबारा करवाने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जज महावीर सिंह सिंधु के आदेश आने से पहले ही शव का अंतिम संस्कार किया जा चुका था। मृतक बलजीत सिंह के भाई प्रीतपाल का आरोप है कि पुलिस व प्रशासन की तरफ से उसके भाई के शव का जबरदस्ती अंतिम संस्कार करवाया गया है।
मृतक की पत्नी और भाइयों ने अपनी मर्जी से शव लिया था। हमने किसी प्रकार का कोई दबाव नहीं बनाया। शव के दोबारा पोस्टमार्टम के लिए अनुमति नहीं मिली थी। -बिजेंद्र सिंह, पुलिस थाना प्रभारी, साल्हावास।
नियमानुसार दोबारा पोस्टमार्टम करवाने के लिए आईओ या ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की पावर होती है। इसमें प्रशासन का कोई रोल नहीं होता। - शिखा, एसडीएम, झज्जर।