मामले की जानकारी देतीं एसएसपी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गुरप्रीत अपने पैसों से सुखजीत को शराब पिलाता था। सुखजीत की पत्नी जीवनदीप कौर ने इन लोगों के साथ शराब पीने का विरोध भी किया था। पुलिस ने अपनी जांच में पाया कि 19 जून को गुरप्रीत सिंह, उसकी पत्नी खुशदीप कौर और दोस्त सुखविंदर सिंह संघा साथ दिखे थे। इन लोगों ने 20 जून को गुरप्रीत सिंह की सड़क हादसे में मौत की झूठी कहानी बनाकर राजपुरा थाना में दुर्घटना का मामला दर्ज कराया था।
इस मामले में उस समय नया मोड़ आया जब राजपुरा पुलिस को एक कुचला हुआ शव मिला। जिसकी पहचान आरोपी महिला खुशदीप कौर ने अपने पति गुरप्रीत सिंह के तौर पर की जबकि यह लाश सुखदीप सिंह की थी। एसएसपी के अनुसार इन लोगों ने शराब में नशीली दवा पिलाकर उसे बेसुध कर दिया और उसे कार में लादकर सड़क पर फेंक दिया। इसके बाद ट्रक के पीछे वाले टायरों से दो बार उसका सिर कुचल दिया। जिससे उसकी मौत हो गई।
10 माह से बना रह थे योजना
गुरप्रीत सिंह ने राजपुरा थाना में दुर्घटना का केस दर्ज करवाकर पोस्टमार्टम के बाद सुखदीप सिंह का शव लेकर उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए फतेहगढ़ साहिब पुलिस ने ह्यूमन इंटेलिजेंस व फॉरेंसिक टीम की मदद से जांच आगे बढ़ाई। इसमें सामने आया कि गुरप्रीत सिंह हल्दी बनाने वाली कंपनी का होलसेल व्यापारी है।
व्यापार में घाटा हुआ था। यही वजह है कि वह कुछ महीनों से गलत योजनाओं को बनाने में लग गया। पुलिस के अनुसार आरोपी 10 महीनों से सुखदीप सिंह के कत्ल की योजना बना रहे थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक ट्रक, एक बलेनो कार और एक मोटरसाइकिल बरामद की है।
पैसे का बंटवारा भी तय कर लिया था
गुरप्रीत सिंह के नाम पर चार करोड़ का बीमा था। गुरप्रीत का दोस्त राजेश कुमार शर्मा फतेहगढ़ साहिब कचहरी में फोटो स्टेट का काम करता है। उसने गुरप्रीत सिंह को भरोसा दिया था कि डेथ सर्टिफिकेट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर बीमा की चार करोड़ राशि परिजनों को मिलेगी। इसके बाद सुखजीत सिंह की हत्या की साजिश रची गई।
पुलिस ने इस मर्डर केस में गुरप्रीत सिंह, उसकी पत्नी खुशदीप कौर, सुखविंदर सिंह संघा, जसपाल सिंह, दिनेश कुमार व राजेश कुमार को गिरफ्तार किया है। बीमा के चार करोड़ रुपये आरोपियों को आपस में बांटने थे। दो करोड़ रुपये गुरप्रीत सिंह और उसकी पत्नी खुशदीप कौर को लेना था। बाकी दो करोड़ में से 20 लाख राजेश कुमार, 10 लाख दिनेश कुमार, 20 लाख जसपाल सिंह और 1.5 करोड़ रुपये सुखविंदर सिंह संघा को लेने थे।