मर्डर के केस में हरियाणा पुलिस ने इतनी चौंकाने वाली करतूत कर दी कि सुनने वालों के होश उड़ गए। मामले में पुलिस ने बहुत बड़ी लापरवाही कर दी। लापरवाही भी ऐसी कि तीन युवकों को सारी उम्र जेल में काटनी पड़ सकती थी। परिवार तीनों को बचाने के चक्कर में अपना सब कुछ गवां देता।
शुक्र रहा तीनों का चालान पेश करने से पहले ही दूसरी वारदात में पकड़े गए एक गिरोह ने हत्या करने की बात स्वीकार ली। खुलासा होने पर पुलिस ने तीनों युवकों को हत्या जैसी संगीन धारा से डिस्चार्ज करवाया।
वहीं, मौके का फायदा उठाते हुए पकड़े गए एक युवक के परिजन से दो लोगों ने युवकों को छुड़ाने के नाम पर 10 लाख रुपये हड़प लिए। खास ये भी रहा कि इतने रुपयों का लेनदेन लघु सचिवालय के पार्क में हुआ, जहां दफ्तर में जिले के तमाम अधिकारी बैठते हैं।
यह था मामला
दरअसल, 18 अगस्त की रात को गुड़गांव निवासी युवक विशाल अपनी कार से हिसार की तरफ जा रहा था। वह लाखनमाजरा क्षेत्र स्थित वह एक ढाबे पर कुछ खाने के लिए रुका। इसके बाद न तो विशाल के बारे में कोई सूचना मिली और न ही उसकी कार के बारे में। तीन दिन बाद लाखनमाजरा माइनर में विशाल का शव बहता हुआ मिला।
आरोपियों ने विशाल की हत्या कर उसकी कार, सोने की चेन और अंगूठी लूटी थी। लाखनमाजरा थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया था। बाद में पुलिस ने बलंभा गांव के तीन युवकों को गिरफ्तार किया था।
यूं हुआ पुलिस की लापरवाही का खुलासा
तीनों को गिरफ्तार करने के कुछ दिन बाद 1 अक्टूबर की रात को सीआईए 2 और कलानौर पुलिस ने बदमाशों के एक गिरोह को दबोचा। गिरोह ने महम और कलानौर इलाके में लूट की ताबड़तोड़ वारदातों को अंजाम दिया था। गिरफ्तार 6 आरोपियों में गिरोह का सरगना भी शामिल था।
इनमें करसौला निवासी पवन उर्फ बादशाह, प्रदीप, मोखरा निवासी विजय उर्फ सोनू, रोहित उर्फ मोटा, सचिन और भिवानी के प्रेमनगर निवासी राजेश उर्फ धोला शामिल रहे। गिरोह ने पुलिस रिमांड में लूट की कई वारदातों सहित विशाल मर्डर केस का भी खुलासा कर दिया।
आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने लूट के इरादे से विशाल की हत्या कर शव नहर में फेंक दिया था। पुलिस ने आरोपियों से भारी मात्रा में हथियार भी बरामद। कबूलनामे के बाद पुलिस ने हत्याकांड में पकड़े बलंभा निवासी तीनों युवकों को डिस्चार्ज कर दिया।
असली नहीं मिलते तो नकली को फंसा देती पुलिस
बड़ा सवाल यही है कि यदि वारदात को अंजाम देने वाले आरोपी हाथ नहीं लगते तो क्या तीनों निर्दोष युवकों को हत्या जैसे संगीन केस में फंसा दिया जाता। पुलिस ने केवल अपनी पीठ थपथपाने के लिए बिना पुख्ता सबूत के यह कार्रवाई की। इतना ही नहीं तीनों को पकड़ने के बाद पुलिस ने बड़ी रोचक कहानी सामने रखी थी।
पुलिस अब तक छिपाती रही लापरवाही
पुलिस की लापरवाही की अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अभी तक भी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मामले पर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। असली आरोपियों को पकड़ने वाले अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने पहले तो सब कुछ बता दिया, लेकिन आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहने की अनुमति का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लिया। गिरोह की रिमांड अवधि में मामले का खुलासा होने के बाद भी पुलिस लापरवाही को दबा गई।
निर्दोष युवक के चाचा से हड़पे 10 लाख
अब इस मामले में एक और खुलासा हुआ है। दो आरोपियों ने निर्दोष युवक के चाचा से उन्हें छुड़वाने के एवज में 10 लाख रुपये हड़प लिए। इस संबंध में सिविल लाइन थाना पुलिस ने बलंभा निवासी रामकुमार की शिकायत पर बलंभा के जयभगवान उर्फ डब्बू और जुलाना थाना के गांव करेला निवासी साधु सरपंच के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है।
जयभगवान और साधु ने विशाल हत्याकांड में पहले आरोपी बनाए गए युवकों को केस से बाहर निकालने के एवज में रामकुमार से 10 लाख रुपये लिये थे। जबकि पुलिस ने पहले ही तीनों युवकों को केस से डिस्चार्ज कर दिया था। इसके बारे में जानकारी मिलने पर रामकुमार ने पुलिस को शिकायत दी। रुपये का लेनदेन लघु सचिवालय स्थित पार्क में हुआ था।
- संदीप कुमार, सिविल लाइन थाना प्रभारी, रोहतक