सतलोक आश्रम के मुखी रामपाल तंत्र-मंत्र करता था। उसकी इस तंत्र-मंत्र से प्रभावित होकर अनुयायी बाबा पर सब कुछ लुटाने को तैयार हो जाते थे। रुपये की बात तो दूर वह जिंदगी भर बाबा के सेवक बनने के लिए राजी हो जाते थे। जान मांगे तो वह भी बाबा के लिए न्यौछावर करना उनके लिए छोटी बात होती थी। यह सब रामपाल के तंत्र-मंत्र पर आधारित था। बाबा के वश में आकर भक्त उसके मुरीद हो जाते थे। इस बात का खुलासा रामपाल ने रिमांड के दौरान पूछताछ में बताया है।
सतनाम देने की फीस थी नौ हजार
रामपाल ने यह भी कबूला है कि उसके आश्रम में होने वाली कमाई नामचर्चा से होती थी। प्रथम चरण में सतनाम देने के लिए रामपाल करीब 9 हजार रुपये की फीस लेता था। उसके बाद यह फीस अंतिम चरण की नामचर्चा पर बढ़कर एक लाख रुपये तक हो जाती थी। जो लोग तंत्र-मंत्र से प्रभावित हो जाते, वे अनुयायी रामपाल के दानपात्र में लाखों रुपये डालकर चले जाते थे।
एक बार के सत्संग में देते थे चार-पांच हजार लोगों को नाम
रामपाल ने बताया है कि हर सत्संग में करीब 25 से 30 हजार लोग जुड़ते थे। इन हजारों लोगों की भीड़ में करीब चार से पांच हजार लोगों को नाम दिया जाता था। चार हजार लोगों से 9-9 हजार रुपये वसूले जाते थे, जिनकी राशि करीब साढ़े तीन से चार करोड़ हो जाती थी।
वर्जन
पूछताछ में रामपाल ने तंत्र-मंत्र से लोगों को वश में करने की बात कबूली है। उसने आश्रम की आय का जरिया भी नामचर्चा देने के नाम पर रुपये लेना बताया है।
-राजबीर सैनी, डीएसपी बरवाला।
रामपाल के कमरे में घंटों रहती थी बबिता
देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार रामपाल की यौन संबंधों के बारे में सनसनीखेज बातें सामने आई हैं। रामपाल की सहयोगी बबीता ने ये बातें पुलिस को दिए बयान में ही हैं।
मेल टूडे की रिपोर्ट के अनुसार, बबीता ने पुलिस को बताया कि वह रामपाल की बेहद खास अनुयायी थी। बबीता को ही रामपाल और उसके बेटे के कमरे में जाने की अनुमति थी।
रामपाल बबीता के साथ बंद कमरे में कई-कई घंटे रहता था। इस दौरान किसी को भी कमरे में आने की अनुमति नहीं थी। उल्लेखनीय है कि पुलिस ने छापेमारी के दौरान रामपाल के कमरे से प्रेगनेंसी किट और अन्य दवाएं भी मिलीं।
बबीता रामपाल के बेटे के साथ उसके कमरे में रहती थी, हालांकि ये साफ नहीं हो पाया कि दोनों के बीच क्या संबंध थे। रामपाल ने बबीता के अकाउंट में 10 लाख रुपये भी फिक्सड डिपॉजिट के रूप में जमा कराए थे। रामपाल के आश्रम में कई महिलाएं बतौर केयर टेकर काम करती थीं, जिन्हें सिद्धिकाएं कहा जाता था। इनमें से कुछ को ही रामपाल के कमरे में जाने की इजाजत थी।
आश्रम का संचालन करती थी बबीता
खास अनुयायी बबीता करौंथा कांड में रामपाल के जेल जाने के बाद से आश्रम का संचालन भी करती थी। जब तक रामपाल जेल में रहे महिला अनुयायियों को निर्देश देने संबंधी जिम्मेदारी उसके पास थी।
पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार बबीता ने बताया है कि वह वर्ष 2002 से आश्रम से जुड़ी थी। रामपाल की शरण में वह उसके फूफा के माध्यम से आई थी। सबसे पहले बबीता के फूफा ने करौंथा आश्रम में रामपाल से मुलाकात करवाई। धीरे-धीरे वह रामपाल की खास अनुयायी बन गई।
जब रामपाल जेल में चला गया तो उसने विश्वसनीयता का परिचय दिया और अच्छे ढंग से आश्रम का संचालन किया। इसके बाद से ही वह रामपाल की विश्वासपात्र बन गई। रामपाल ने उसे अपने आलीशान बंगले में ही रख लिया।