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साध्वियों के यौन शोषण केस में डेरामुखी को हाईकोर्ट से तगड़ा झटका

Sat, 03 Sep 2016 12:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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गुरमीत राम रहीम - फोटो : file photo
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साध्वियों के यौन शोषण के मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को शुक्रवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से करारा झटका लगा।
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हाईकोर्ट ने डेरा प्रमुख की दोनों याचिकाओं को खारिज करने के साथ ही दोनों याचिकाओं के लिए 10-10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया, जो चार हफ्ते में ट्रायल कोर्ट के समक्ष भरना होगा।

जस्टिस एबी चौधरी की बेंच ने डेरा प्रमुख की ओर से उन पर यौन शोषण लगाने वाली दो साध्वियों के सीबीआई को दिए बयान की प्रति उपलब्ध कराने और दोनों साध्वियों के बयान दर्ज करने वाले जांच अधिकारी को जिरह के लिए कोर्ट में बुलाने संबंधी दोनों मांगों को सिरे से खारिज कर दिया।
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हाईकोर्ट ने प्रतिवादी सीबीआई की ओर से पेश दलीलों व दस्तावेजों के आधार पर माना कि याचिकाएं सीबीआई कोर्ट में जारी केसों को लटकाए रखने के लिए गलत उद्देश्यों से दायर की गई हैं।

शुक्रवार को इस मामले पर सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से कहा गया कि विशेष अदालत ने भी याचिकाकर्ता की मांगें ठुकरा दी हैं क्योंकि याचिकाकर्ता केस को लटकाए रखने के लिए जानबूझकर एक या दूसरी याचिकाएं दाखिल कर रहा है। सीबीआई की ओर से यह भी कहा गया कि यह बात समन्वय बेंच ने भी मानी है और बेंच ने भी पाया है कि याचिकाकर्ता केस को लटकाए रखना चाह रहा है।
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130 साध्वियों के बयान रिकार्ड

डेरा प्रमुख बाबा गुरमीत राम रहीम - फोटो : Bureau
सीबीआई की ओर से कहा गया कि दोनों साध्वियों के बयान जांच अधिकारी केएल रैना की ओर से उस समय दर्ज किए गए थ, जब कुल 130 साध्वियों के बयान रिकार्ड किए गए।

अब इस मामले में ट्रायल लगभग पूरा हो चुका है और बचाव पक्ष की ओर से फाइनल बहस की बाकी है। ऐसे में याचिकाकर्ता की मौजूदा याचिकाएं गलत उद्देश्य से दायर की गई हैं।

जस्टिस एबी चौधरी ने अपने फैसले में लिखा कि अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष अपने तथ्य और जिरह पूरी कर चुके हैं। ऐसे में याचिकाकर्ता की ओर से दो साध्वियों के बयानों की प्रति की मांग और जांच अधिकारी को तलब करने की मांग का मुख्य कारण यही दिखाई दे रहा है कि याचिकाएं जानबूझ कर ट्रायल पर देरी करने के लिए दायर की गई हैं।

उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने डेरा प्रमुख की इन दोनों याचिकाओं के विचाराधीन रहने तक सीबीआई कोर्ट में उनके खिलाफ चल रहे केसों पर कोई भी फैसला देने पर रोक लगा दी थी, लेकिन शुक्रवार को हाईकोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के बाद अब सीबीआई कोर्ट डेरा प्रमुख के खिलाफ दायर मामले में फैसला सुनाने के लिए स्वतंत्र है। 

 
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