दस वर्ष के दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) में दवा खरीद में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ। यह राशि करीब 2600 करोड़ रुपये तक होने का अनुमान है।
स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की सिफारिश के बाद मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं। पिछले दिनों स्वास्थ्य मंत्री ने एनआरएचएम में निरीक्षण किया था। इसी दौरान करोड़ों की हेराफेरी की बात सामने आई थी।
एनआरएचएम का सालाना बजट करीब 500 करोड़ है, जिसमें 50 फीसदी से अधिक खर्च दवाओं के मद में है। पिछले दिनों दवा व उपकरणों की खरीद में नियमों की अनदेखी के मामले सामने आए थे। गलत ढंग से भर्तियां कर एनआरएचएम में जरूरत से अधिक स्टाफ रख लिया गया था।
इससे 53 कर्मचारी मुख्यालय से हटाए भी जा चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने एनआरएचएम में जो अनियमितताएं पकड़ी, उनकी रिपोर्ट मुख्य सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजी जा चुकी है। इसके अध्ययन के बाद मुख्यमंत्री ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं।
करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति
एनआरएचएम की ओर से करोड़ों रुपये की दवाइयां खरीदने के बावजूद राज्य के स्वास्थ्य संकेतकों में बढ़ोतरी नहीं हुई है। अस्पतालों में ओपीडी बढ़ गई। डॉक्टरों से सिर्फ उन्हीं से जुड़े काम लिए जा रहे हैं, इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है।