टिकट के दलाल छोटे रेलवे स्टेशनों से यात्रियों के नाम और पते के आधार पर तत्काल में टिकट आरक्षण करा लेते हैं और टिकट में दिए गए पूरे ब्यौरे को यात्री को मेल कर बता देते हैं। जिसके आधार पर आईआरसीटीसी की ओर से अधिकृत किए गए टिकट एजेंटों से मुसाफिर संपर्क करके अपने टिकट का प्रिंट आउट प्राप्त कर लेता है।
इसके लिए कुछ रुपये भी खर्च करने होते हैं। ई- टिकट सिस्टम में एक फॉर्मेट होता है। जिसमें टिकट की सूचनाएं भरकर आसानी से प्रिंट लिया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि इसमें रेलवे को कोई नुकसान नहीं हो रहा है। उसको टिकट के पूरे पैसे मिल रहे हैं किंतु यात्रियों की जेब तराशी जा रही है।
देशभर से 72 लोग गिरफ्तार
आरपीएफ ने ई- टिकट की अवैध सॉफ्टवेयर के जरिए दलाली का अब तक सबसे बड़ा खुलासा करते हुए देश भर से 27 लोगों को गिरफ्तार किये हैं। इनमें से अकेले यमुनानगर से दस दिनों में पांच लोग पकड़े गए हैं।
तीन लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इनमें से दो को अंबाला की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया। पंकज का देश के बड़े ई टिकट सरगना गुलाम मुस्तफा से लिंक सामने आया है। आरोपी को इंट्रोगेट किया जा रहा है। -रमेश श्योराण, कंपनी कमांडेट, आरपीएफ